ग्रामोदय विश्वविद्यालय में हुआ ‘शबरी के राम’ का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन
1 min read

चित्रकूट- 17 जून 2026। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के वाल्मीकि सभागार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), नई दिल्ली एवं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आई ओ सी एल) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चिल्ड्रेन थिएटर वर्कशॉप-2026 के समापन अवसर पर बाल रंगमंचीय नाटक ‘शबरी के राम’ का भव्य एवं मनोहारी मंचन किया गया। बाल कलाकारों की उत्कृष्ट प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया तथा उपस्थित जनों ने कार्यक्रम की मुक्त कंठ से सराहना की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सतना सांसद श्री गणेश सिंह थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष श्री रति शंकर त्रिपाठी ने की। कार्यशाला का निर्देशन सुप्रसिद्ध रंगकर्मी मुस्कान गोस्वामी ने किया।

मुख्य अतिथि श्री गणेश सिंह ने बाल कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि माता शबरी और प्रभु श्रीराम का प्रसंग चित्रकूट वनांचल की सांस्कृतिक एवं भावनात्मक पहचान का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि अयोध्या आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु चित्रकूट की पावन भूमि पर भी आना चाहता है, क्योंकि भगवान श्रीराम के वनवास काल का महत्वपूर्ण हिस्सा चित्रकूट से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राम वन पथ के विकास का कार्य प्रारंभ हो चुका है, जो भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने चित्रकूट की 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में स्थित संत-महात्माओं की तपोभूमियों, साधना स्थलों एवं सांस्कृतिक धरोहरों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए संस्कृति मंत्रालय से ऐसे स्थलों के चिन्हांकन एवं विकास की अपेक्षा व्यक्त की। उन्होंने इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु शासन स्तर पर एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का सुझाव भी दिया।
अपने उद्बोधन में श्री सिंह ने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों, गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान की संस्कृति का देश है। चित्रकूट वह पुण्यभूमि है जहाँ भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल का लंबा समय व्यतीत किया और यहाँ की कण-कण में राम का वास है। उन्होंने नानाजी देशमुख की जयंती पर प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए चित्रकूट को भारतीय संस्कृति, ग्रामोदय और लोकजीवन के पुनर्जागरण का प्रेरणास्थल बताया।

विशिष्ट अतिथि कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने कहा कि मानव जीवन में संवेदनाओं का विशेष महत्व है। इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों की आंतरिक संवेदनाओं, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाती है तथा शिक्षा के साथ कला और संस्कृति का समन्वय विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की टीम को विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह में प्रस्तुति हेतु आमंत्रित भी किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष श्री रति शंकर त्रिपाठी ने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को जोड़ने वाला सशक्त उपकरण है। उन्होंने बाल कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय और कार्यशाला की उपलब्धियों की सराहना की।
कार्यशाला निदेशक मुस्कान गोस्वामी ने कहा कि चित्रकूट जैसी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक भूमि पर आयोजित यह कार्यशाला बच्चों के लिए सीखने और आत्म-अभिव्यक्ति का अनूठा अवसर रही। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल एक नाट्य प्रस्तुति तैयार करना नहीं, बल्कि ‘थिएटर इन एजुकेशन’ की अवधारणा के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, टीम भावना और सामाजिक संवेदनशीलता का विकास करना था।
उन्होंने कहा कि ‘शबरी के राम’ माता शबरी के निष्कलंक प्रेम, अटूट श्रद्धा, समर्पण और धैर्य की कथा है, जो यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति किसी जाति, वर्ग या भेदभाव की मोहताज नहीं होती। यह प्रस्तुति प्रेम, करुणा, आस्था और मानवीय मूल्यों का उत्सव है तथा भारतीय संस्कृति की सुंदरता को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रभावी प्रयास है।

कार्यशाला के दौरान बच्चों को अभिनय, संगीत, गायन, नृत्य, वाणी एवं भाषण कला, मंच सज्जा, व्यक्तित्व विकास, टीमवर्क और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय एवं विश्वविद्यालय परिवार के पदाधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।


Subscribe to my channel