धौराभाठा में विकास के नाम पर लीपापोती ? दुर्दशा पर आंसू बहा रही सड़कें !
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जनपद पंचायत जनपद पंचायत धरमजयगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत धौराभाठा के जावेद पारा में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से लगभग 30 लाख रुपये की लागत से निर्मित पुलिया और सम्भवतः किसी अन्य मद से निर्मित सीसी सड़क अब खुलकर निर्माण में गंभीर अनियमितताओं की कहानी बयां कर रही हैं। स्थल की वास्तविक स्थिति यह संकेत दे रही है कि कार्य प्राक्कलन और तकनीकी मानकों की अनदेखी कर जल्दबाजी या लापरवाही में पूरा किया गया।

पुलिया पर सुरक्षा हेतु लगाई गई रेलिंग आधी अधूरी दिखाई दे रही है, यानि पुल के दोनों ओर कुछ दूर रेलिंग बनाकर खानापूर्ति कर दी गई है है और जहां लगाई गई है, वहां भी दरारें उभर चुकी हैं। ढलाई कार्य में स्पष्ट रूप से गुणवत्ता की कमी दिखाई दे रही है। पुलिया से जुड़ी सड़क का निचला हिस्सा कुछ स्थानों पर खोखला होने लगा है, जो संरचनात्मक मजबूती पर सीधा प्रश्न नहीं बल्कि गंभीर चेतावनी है। यह स्थिति भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

वहीं, डेढ़ से दो वर्ष पूर्व निर्मित सीसी सड़क की हालत और भी चिंताजनक है। निर्माण के एक महीने के भीतर ही सड़क उखड़ने लगी थी और वर्तमान में अधिकांश हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद टिकाऊ निर्माण न होना सीधे तौर पर गुणवत्ता नियंत्रण की विफलता और संभावित वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
इन दोनों कार्यों में यदि स्वीकृत राशि, कार्यादेश, प्राक्कलन, माप पुस्तिका (एमबी) और भुगतान अभिलेखों की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए तो वास्तविकता सामने आ सकती है। सामाजिक अंकेक्षण और स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण से ही यह स्पष्ट होगा कि निर्माण में लापरवाही हुई है या सार्वजनिक धन का दुरुपयोग।

सार्वजनिक संसाधनों से किए गए इस तरह के विकास कार्य आम नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों के साथ भी समझौता है। अब आवश्यकता है कठोर जांच, जवाबदेही तय करने और दोषियों पर ठोस कार्रवाई की, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके।
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