धरमजयगढ़ धान खरीदी केंद्र में किसानों को नियमों की जानकारी सहजता से देने की बजाय उनके साथ अपमानजनक भाषा और व्यवहार की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी क्रम में मंगलवार को एक किसान के साथ हुई घटना ने मंडी प्रबंधन की कार्यशैली पर फिर सवाल खड़े कर दिए।
घटना के अनुसार बांसजोर निवासी किसान धनी यादव अपने धान की बिक्री के लिए धरमजयगढ़ मंडी पहुंचे थे। जारी टोकन से अधिक धान होने के कारण लगभग 15 बोरा धान उन्हें वापस ले जाना था। उन्होंने इस संबंध में मंडी प्रबंधक से बात की, जहाँ से उन्हें धान वापस ले जाने की अनुमति दे दी गई। लेकिन जब वे इसे लेकर नोडल अधिकारी के पास पहुंचे तो अधिकारी ने इससे मना कर दिया।
किसान द्वारा मंडी प्रबंधक का हवाला देने पर नोडल अधिकारी कथित रूप से नाराज़ हो गए और उनसे तीखी भाषा में बात की। किसान ने अधिक धान होने का हवाला देकर अनुरोध किया और उचित व्यवस्था की मांग की, लेकिन उन्हें धान किसी अन्य साधन से वापस ले जाने को कहा गया।
इस पूरे प्रकरण में मंडी प्रबंधक और नोडल अधिकारी के बीच स्पष्ट समन्वय की कमी दिखाई देती है। आपसी तालमेल न होने का सीधा खामियाज़ा किसानों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें धान बेचने के लिए पहले ही लंबे इंतज़ार और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
किसानों का कहना है कि खरीदी केंद्रों में अधिकारी यदि नियमों को शांति और सम्मानपूर्वक समझाएं तो ऐसी स्थितियाँ पैदा ही न हों, लेकिन सरेआम फटकार और अभद्र व्यवहार से किसान तनावग्रस्त होते हैं और खरीदी व्यवस्था की छवि भी खराब होती है।