स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय गौरव और सामाजिक चेतना का संदेश लेकर 14 गांवों में पहुंचे एकेएस विश्वविद्यालय के रावे एवं एआईए विद्यार्थी
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सतना, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस केवल देश की आजादी का पर्व नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, एकता, अनुशासन और जिम्मेदारी का संकल्प लेने का अवसर भी है। इसी भावना को ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने के उद्देश्य से एकेएस विश्वविद्यालय, सतना के कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय के अंतर्गत संचालित ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) एवं कृषि-औद्योगिक संबद्धता (एआईए) कार्यक्रम के विद्यार्थियों ने सतना जिले के 14 आवंटित गांवों में स्वतंत्रता दिवस समारोहों में सक्रिय सहभागिता निभाई।

विद्यार्थियों ने ग्राम पंचायत, सरपंच, सचिव, विद्यालय प्राचार्य एवं शिक्षकों के सहयोग से ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और स्वतंत्रता दिवस समारोहों में भाग लिया। इस दौरान ग्रामीणों एवं स्कूली बच्चों के साथ स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रनिर्माण और नागरिक कर्तव्यों के साथ स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण तथा कृषि की भूमिका पर संवाद किया गया।
14 गांवों में पहुंचा राष्ट्रभक्ति और जागरूकता का संदेश

सरिया टोला, मरौहा, माधवगढ़, इटमा, कोलार, बरेठिया, मौहारी, सितपुरा, मतरी, बर्मेंद्र, सेमरी दुबे, गोबराव खुर्द, मढ़ी एवं बगिया में विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता दिवस की भावना को ग्रामीण जीवन से जोड़ते हुए लोगों को स्वच्छ, स्वस्थ और आत्मनिर्भर गांव बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मध्य प्रदेश शासन के हरियाली अभियान की भावना के अनुरूप पौधरोपण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश भी दिया।

बच्चों को बताया स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ
विद्यालयों में विद्यार्थियों ने बच्चों को बताया कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल अधिकार प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझना भी है। बच्चों को स्वच्छता अपनाने, विद्यालय एवं गांव को साफ रखने, पर्यावरण की रक्षा करने और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया गया।

स्वतंत्रता दिवस के माध्यम से बच्चों में देशभक्ति, अनुशासन, एकता और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।

कृषि और ग्रामीण विकास को राष्ट्रनिर्माण से जोड़ा
रावे एवं एआईए विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को बताया कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन की आधारशिला है। आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग, कृषि उत्पादन में वृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और किसानों की आय में सुधार राष्ट्र की प्रगति से सीधे जुड़े विषय हैं।

विद्यार्थियों ने कृषि को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया।

स्वतंत्रता दिवस बना सीख और सेवा का अवसर
इस आयोजन का महत्व इसलिए भी विशेष रहा कि राष्ट्रीय पर्व को विश्वविद्यालय की ग्रामीण सहभागिता और कृषि शिक्षा से जोड़ा गया। रावे एवं एआईए विद्यार्थियों को गांवों में प्रत्यक्ष संवाद, जनजागरूकता और सामाजिक सहभागिता का अनुभव मिला। वहीं ग्रामीणों एवं बच्चों तक राष्ट्रभक्ति के साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, कृषि जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश पहुंचा। इस प्रकार स्वतंत्रता दिवस विद्यार्थियों के लिए केवल समारोह का दिन न रहकर सीख, सेवा और राष्ट्रनिर्माण की भावना को व्यवहार में उतारने का अवसर बना।
कार्यक्रम की सफलता पर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय के अधिष्ठाता डॉ. ए.के. भौमिक, कृषि विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज वर्मा एवं रावे एवं एआईए कार्यक्रम समन्वयक श्री अनूप शुक्ला ने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण समुदाय के साथ विद्यार्थियों का जुड़ाव उन्हें सामाजिक उत्तरदायित्व समझने और कृषि शिक्षा को जनहित से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है।
विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर इंजीनियर अनंत कुमार सोनी एवं कुलपति डॉ. बी.ए. चोपड़े सहित विश्वविद्यालय प्रबंधन एवं अधिकारियों ने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों को ग्रामीण क्षेत्रों में जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और उत्साह के साथ कार्य करते हुए कृषि, पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रामीण विकास में निरंतर योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
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