एकेएस विश्वविद्यालय: रावे एवं कृषि-औद्योगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत माधवगढ़ में गाजर घास उन्मूलन एवं जनजागरूकता अभियानपर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन एवं कृषि विस्तार का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं विद्यार्थी
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सतना। एकेएस विश्वविद्यालय, सतना के कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित रावे (ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव) एवं कृषि-औद्योगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत नमः ग्रामीण विकास संस्था के सहयोग से माधवगढ़ ग्राम में गाजर घास (पार्थेनियम) उन्मूलन एवं जनजागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण कृषि विस्तार, पर्यावरण संरक्षण तथा वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना तथा किसानों एवं ग्रामीणों को गाजर घास के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था।

अभियान के दौरान रावे की छात्राओं ने ग्राम के सार्वजनिक स्थलों एवं आसपास के क्षेत्रों से गाजर घास का जड़ सहित उन्मूलन किया तथा ग्रामीणों को इसके दुष्प्रभावों और वैज्ञानिक नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। छात्राओं ने बताया कि पार्थेनियम एक अत्यंत हानिकारक खरपतवार है, जो मानव स्वास्थ्य, पशुधन, कृषि फसलों तथा जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा है। इसके संपर्क से त्वचा संबंधी एलर्जी, श्वसन संबंधी रोग एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही यह कृषि उत्पादन को प्रभावित कर पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
रावे एवं कृषि-औद्योगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थी ग्रामीण समुदाय के साथ प्रत्यक्ष रूप से कार्य करते हुए कृषि विस्तार की कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, जनजागरूकता अभियान के संचालन तथा किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के प्रभावी प्रसार का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल तथा ग्रामीण समस्याओं के समाधान के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नमः ग्रामीण विकास संस्था के अध्यक्ष श्री अर्पित द्विवेदी ने कहा कि रावे एवं कृषि-औद्योगिक प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित ज्ञान को ग्रामीण परिस्थितियों में व्यवहारिक रूप से लागू करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम कृषि विस्तार, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर छात्राओं ने गाजर घास मुक्त ग्राम, स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के व्यापक प्रसार का संकल्प लिया। साथ ही ग्रामीणों से भी अपील की गई कि वे गाजर घास को फूल एवं बीज बनने से पहले जड़ सहित उखाड़कर सुरक्षित तरीके से नष्ट करें, जिससे इसके प्रसार को प्रभावी रूप से रोका जा सके।
इस अभियान के सफल आयोजन एवं संचालन में विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर ई. अनंत कुमार सोनी, कुलपति प्रो. (डॉ.) बी. ए. चोपड़े, कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय के अधिष्ठाता डॉ. ए. के. भौमिक, कृषि संकायाध्यक्ष डॉ. नीरज वर्मा, रावे एवं कृषि-औद्योगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक श्री अनुप शुक्ला, नमः ग्रामीण विकास संस्था के अध्यक्ष श्री अर्पित द्विवेदी तथा माधवगढ़ ग्राम में कार्यरत छात्र-छात्राओं का विशेष योगदान रहा। उनके समन्वित प्रयासों से यह अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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