July 11, 2026

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कुदरत ने पैरों से किया लाचार, व्यवस्था ने उम्मीदों से; धरमजयगढ़ की सड़क पर हाथों के बल रेंगता मिला दिव्यांग, संवेदनाओं को झकझोर गई तस्वीर !

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धरमजयगढ़ – एक ओर कुदरत का क्रूर मज़ाक, दूसरी ओर व्यवस्था की उदासीनता। धरमजयगढ़ नगर में सामने आया एक दृश्य हर संवेदनशील व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर देता है। मुख्य सड़क पर लगभग 30–35 वर्षीय दिव्यांग युवक गणेश यादव दोनों हाथों के सहारे रेंगते हुए आगे बढ़ रहे थे। यह मंजर देखकर राहगीरों की आंखें नम हो गईं और हर किसी के मन में एक ही सवाल उठा कि आखिर दिव्यांगजनों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं का लाभ ऐसे जरूरतमंद तक क्यों नहीं पहुंच पाया।
जानकारी के अनुसार, धरमजयगढ़ क्षेत्र के कमोसिनडांड गांव निवासी गणेश यादव जन्म से ही दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। किसी आवश्यक कार्य से वे धरमजयगढ़ आए थे, लेकिन रास्ता भटक जाने के बाद जनपद पंचायत कार्यालय की ओर जाने के लिए उन्हें मुख्य सड़क पर हाथों के सहारे रेंगते हुए चलना पड़ा। व्यस्त सड़क पर यह दृश्य न केवल पीड़ादायक था, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता का भी आईना बन गया।
मौके पर मौजूद पत्रकारों ने जब गणेश यादव से बातचीत की तो उनकी पीड़ा और भी गहरी होकर सामने आई। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार गांव के जनप्रतिनिधियों, सरपंच और सचिव से ट्राइसाइकिल तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की गुहार लगाई, लेकिन आज तक कोई सहायता नहीं मिली। उनका कहना है कि मजबूरी में उन्हें हर छोटे-बड़े काम के लिए इसी तरह हाथों के सहारे चलना पड़ता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकारों ने तत्काल जनपद पंचायत धर्मजयगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के संज्ञान में यह विषय लाया। अधिकारी ने मामले की जांच कर पात्रता के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। जब दिव्यांगजनों के लिए ट्राइसाइकिल, सहायक उपकरण और अन्य कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं, तब गणेश यादव जैसे जरूरतमंद व्यक्ति तक इन योजनाओं का लाभ आखिर क्यों नहीं पहुंचा? क्या संबंधित विभागों ने कभी उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया? यदि नहीं, तो यह केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही और संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्न है। अब देखना होगा कि प्रशासन का यह आश्वासन कितनी जल्दी धरातल पर उतरता है और गणेश यादव को सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता कब तक मिल पाती है।

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