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July 9, 2026

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सामरसिंघा कोल ब्लॉक में 34 स्थानों पर होगी 480 मीटर गहरी ड्रिलिंग, 264 टन से अधिक नमूने निकालने की तैयारी !

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धरमजयगढ़ – रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र स्थित सामरसिंघा कोल ब्लॉक में कोयला अन्वेषण को लेकर सामने आए आधिकारिक परियोजना दस्तावेज़ से कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुए हैं। दस्तावेज़ के अनुसार ब्लॉक में 34 स्थानों पर 480 मीटर तक गहरी ड्रिलिंग की जाएगी तथा परीक्षण के लिए 2,64,488 किलोग्राम (लगभग 264.5 टन) कोयला एवं अन्य चट्टानों के नमूने एकत्र किए जाएंगे।
दस्तावेज़ के अनुसार सामरसिंघा कोल ब्लॉक का कुल क्षेत्रफल 1605.0459 हेक्टेयर है, जिसमें 580.8941 हेक्टेयर वन भूमि तथा 1024.1518 हेक्टेयर गैर-वन भूमि शामिल है। परियोजना में दावा किया गया है कि वन क्षेत्र में केवल 34 बोरहोल बनाए जाएंगे और प्रत्येक बोरहोल का व्यास 4 इंच होगा। कंपनी का कहना है कि ड्रिलिंग के लिए केवल 3.4 हेक्टेयर वन भूमि का अस्थायी उपयोग होगा तथा स्थायी रूप से वन भूमि के उपयोग में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
परियोजना विवरण के अनुसार यह कार्य G-1 स्तर के विस्तृत कोयला अन्वेषण का हिस्सा है। इसका उद्देश्य भूमिगत कोयला भंडार का वैज्ञानिक आकलन करना है। दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख है कि ड्रिलिंग कार्य साउथ वेस्ट पिनेकल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाएगा, जबकि परियोजना कोल इंडिया लिमिटेड और सीएमपीडीआई के माध्यम से संचालित की जा रही है।
हालांकि दस्तावेज़ में सड़क निर्माण, खाई खोदने और बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन से इनकार किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार की ड्रिलिंग, मशीनों की आवाजाही और नमूना संग्रह की गतिविधियाँ संबंधित वैधानिक स्वीकृतियों एवं निर्धारित शर्तों के अनुरूप ही होनी चाहिए। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि इस परियोजना के लिए आवश्यक वन एवं अन्य वैधानिक अनुमतियाँ किस स्तर तक प्राप्त की गई हैं और क्या स्थल पर कार्य उन्हीं शर्तों के अनुरूप किया जा रहा है।
दस्तावेज़ में यह भी स्पष्ट है कि वर्तमान गतिविधि केवल कोयला अन्वेषण से संबंधित है, न कि व्यावसायिक खनन से। इसके बावजूद भविष्य में यदि इस क्षेत्र में खनन प्रस्तावित होता है तो पर्यावरणीय, वन एवं अन्य कानूनी स्वीकृतियों की प्रक्रिया अलग से पूरी करनी होगी।
परियोजना से जुड़े इस दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने के बाद अब यह अपेक्षा की जा रही है कि संबंधित विभाग परियोजना से जुड़ी सभी स्वीकृतियों, वन भूमि उपयोग की शर्तों तथा वास्तविक कार्यों की जानकारी सार्वजनिक करें, ताकि स्थानीय लोगों के बीच किसी प्रकार की आशंका या भ्रम की स्थिति न रहे।

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