कोयलार में ‘कागजी सड़क’ का खेल! लाखों की सड़क-सह-नाली गायब , अदृश्य नाली से भ्रष्टाचार की बू !
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धरमजयगढ़ – ग्राम पंचायत कोयलार में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के कथित बंदरबांट का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कोयलार से माण्ड नदी तक लगभग 800 मीटर लंबाई में बनने वाली लाखों रुपये लागत की कच्ची सड़क सह नाली निर्माण योजना कागजों में तो तेजी से दौड़ रही है, लेकिन धरातल पर उसका नामोनिशान तक दिखाई नहीं दे रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जिस निर्माण कार्य का अस्तित्व मौके पर नजर नहीं आता, उसके लिए रिकॉर्ड में भुगतान भी दर्ज हो चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 20 हजार रुपये का भुगतान किया जा चुका है और सरकारी अभिलेखों में कार्य को “चालू” बताया जा रहा है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि निर्माण स्थल पर न सड़क दिखाई देती है, न नाली और न ही कोई मजदूर काम करते नजर आते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि योजनाबद्ध तरीके से सरकारी धन की बंदरबांट का प्रतीत होता है। सवाल यह उठ रहा है कि जब जमीन पर एक ईंट तक नहीं रखी गई तो भुगतान किस आधार पर किया गया? किसने कार्य का सत्यापन किया? और किस अधिकारी ने कार्य को प्रगति पर मानते हुए भुगतान की अनुमति दी?
यह पूरा मामला पंचायत व्यवस्था में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, निगरानी तंत्र की विफलता और जिम्मेदार लोगों की उदासीनता को उजागर करता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह के मामलों पर रोक नहीं लगी तो विकास कार्य केवल फाइलों और पोर्टलों तक ही सीमित रह जाएंगे, जबकि जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसती रहेगी।
क्षेत्र में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी है और ग्रामीण अब उच्च अधिकारियों, जिला प्रशासन तथा जांच एजेंसियों से शिकायत करने की तैयारी में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो इस कथित “अदृश्य सड़क” के पीछे छिपे पूरे खेल का पर्दाफाश हो सकता है।
अब यह सवाल है कि जब सड़क और नाली धरातल पर मौजूद ही नहीं है, तब सरकारी रिकॉर्ड में काम कैसे चल रहा है और भुगतान कैसे हो रहा है? यह प्रश्न केवल कोयलार की एक योजना का नहीं, बल्कि विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
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