जिला शिक्षा अधिकारी की कुर्सी पर फाइलों का बोझ! 24 घंटे का अल्टीमेटम, 5 दिन बाद भी ‘टेबल में दबी’ फाइल
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जांजगीर-चांपा, 18 जून 2026। रिटायरमेंट की राशि निकालने के नाम पर सेवानिवृत्त शिक्षकों से रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगे दो कर्मचारियों पर कार्रवाई सिर्फ नोटिस जारी करने तक सिमट गई है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने 24 घंटे में जवाब मांगा था, लेकिन 5 दिन बीत जाने के बाद भी न तो जवाब का अवलोकन हुआ, न कोई कार्रवाई।
पामगढ़ बीईओ कार्यालय में तैनात सहायक ग्रेड-03 बाबूलाल पुर्णव और सहायक ग्रेड-02 पुरुषोत्तम यादव पर आरोप है कि उन्होंने रिटायरमेंट फाइल निकलवाने के एवज में रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता पुर्व माध्यमिक शाला, पूर्व प्रधान पाठक बुजपाल सिंह ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि पुरुषोत्तम यादव ने BEO के सामने, उनसे एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाबूलाल पुर्णव पर भी इसी तरह की शिकायत है।
DEO का 24 घंटे का अल्टीमेटम… और फिर सन्नाटा:
शिकायत मिलने के बाद DEO अशोक सिन्हा ने 11 जून को दोनों कर्मचारियों को शोकॉज नोटिस जारी कर 24 घंटे के अंदर लिखित जवाब मांगा था। लेकिन 5 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
• कर्मचारियों ने जवाब दे दिया, लेकिन DEO ने अभी तक उसे पढ़ा तक नहीं।
• गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप के बावजूद पूरी प्रक्रिया ‘फाइल दबाने’ की परंपरा में फंस गई।
DEO अशोक सिन्हा का बयान है:
“दोनों कर्मचारियों का जवाब आ गया है, लेकिन अब तक अवलोकन नहीं कर पाया हूं।”
‘टेबल में दब जाती है फाइल’ — DEO ऑफिस की पुरानी परंपरा:
यह कोई पहला मामला नहीं है। DEO कार्यालय में शोकॉज नोटिस जारी होने के बाद ज्यादातर फाइलें टेबल पर ही दब जाती हैं। शिकायतकर्ताओं को न तो आगे की जानकारी दी जाती है और न ही दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है।
शिकायतकर्ता बुजपाल सिंह पहले भी पेंशन मामले में तीन बार छेड़छाड़ का शिकार हो चुके हैं। तीन बार सुधार के बाद ही पेंशन शुरू हुई। इस पूरे प्रकरण में उन्हें काफी मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी।
सवाल खड़े होते हैं…
- 24 घंटे का अल्टीमेटम देने वाले DEO को 5 दिन में फाइल देखने का समय क्यों नहीं मिला?
- क्या रिश्वतखोरी के आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है?
- DEO कार्यालय में फाइल दबाने की यह संस्कृति कब तक चलेगी?
उद्घोष समय न्यूज़ इस मामले की लगातार निगरानी कर रहा है। यदि प्रशासन ने तुरंत संज्ञान नहीं लिया तो यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला उदाहरण बन जाएगा।
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