कलेक्टर हर्षल पंचोली की संवेदनशील पहल से पांच बच्चों को मिला नया जीवन, भोपाल में हुई सफल हार्ट सर्जरी
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों का निःशुल्क उपचार, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयास रंग लाए
यशपाल जाट अनुपपुर
अनूपपुर। जिले के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कलेक्टर हर्षल पंचोली की संवेदनशीलता और सतत निगरानी ने एक बार फिर मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत जिले के पांच गंभीर हृदय रोग से पीड़ित बच्चों—साक्षी, दिव्यांशी, आयुष, संध्या एवं प्रियंका—को नया जीवन मिला है। कलेक्टर श्री पंचोली के विशेष प्रयासों और त्वरित निर्णय के चलते इन बच्चों को भोपाल स्थित चिरायु हेल्थ एंड मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड में निःशुल्क उपचार एवं सर्जरी के लिए रेफर किया गया, जहां उनकी सफल हार्ट सर्जरी संपन्न हुई।

कलेक्टर हर्षल पंचोली के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलका तिवारी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्चों के उपचार की पूरी प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ संपादित किया। जिला चिकित्सालय के डॉ. मोहन सिंह श्याम, डॉ. वीरेंद्र खेस, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. के.के. बघेल एवं डॉ. एस.एन. पिटानिया सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों ने समन्वित प्रयास कर बच्चों की जांच, रेफरल और सर्जरी की प्रक्रिया को सफल बनाया।
भोपाल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा साक्षी, दिव्यांशी, आयुष एवं प्रियंका की जटिल हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। ऑपरेशन के बाद सभी बच्चों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है और वे सामान्य गतिविधियों की ओर लौट रहे हैं। बच्चों की सेहत में आए सकारात्मक बदलाव से उनके परिजनों के चेहरों पर खुशी और संतोष साफ दिखाई दे रहा है।
आरबीएसके के जिला प्रबंधक डॉ. एस.एन. पिटानिया ने बताया कि सर्जरी के बाद बच्चों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है तथा चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार उनकी देखभाल की जा रही है। इस पूरे अभियान में आरबीएसके टीम के चिकित्सकों डॉ. प्रीति जैन, डॉ. कृष्णप्रताप सिंह, डॉ. आशीष कुमार शिवहरे, डॉ. अजय कुमार मंडल, डॉ. राज बहोर साहू सहित वाहन चालक सोनू पनिका एवं अल्लू पाठक का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कलेक्टर हर्षल पंचोली ने आमजन से अपील की है कि वे अपने बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं, ताकि किसी भी गंभीर बीमारी की समय रहते पहचान कर उसका उपचार कराया जा सके। जिला प्रशासन का यह मानवीय प्रयास न केवल पांच बच्चों के जीवन में नई उम्मीद लेकर आया है, बल्कि यह भी साबित करता है कि संवेदनशील प्रशासनिक नेतृत्व से जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।

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