ए.के.एस. विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित
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सतना। ए.के.एस. विश्वविद्यालय, सतना के विधि संकाय के शोधकर्ताओं ने शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। विश्वविद्यालय के डॉ. सुधीर कुमार जैन, प्रशान्त कुमार एवं दीपमाला परमार द्वारा संयुक्त रूप से लिखित शोध पत्र “महिलाओं के मानवाधिकार एवं समान नागरिक संहिता : वैश्विक दृष्टिकोण और भारतीय कानून” प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंटिफिक डेवलपमेंट एंड रिसर्च (आईजेएसडीआर) (आईएसएसएन : 2455-2631) के मई 2026 अंक, वॉल्यूम-11, इश्यू-5 में प्रकाशित हुआ है।

शोध पत्र में भारत में महिलाओं के मानवाधिकारों और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मध्य संबंधों का गहन एवं व्यापक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। शोधकर्ताओं ने विभिन्न देशों में प्रचलित नागरिक कानूनों, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों तथा भारतीय विधिक व्यवस्था का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि समान नागरिक संहिता किस प्रकार लैंगिक समानता को सुदृढ़ कर सकती है तथा महिलाओं के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद भेदभावपूर्ण प्रावधानों को समाप्त कर एक समान नागरिक कानून की व्यवस्था महिलाओं को अधिक न्यायसंगत और समान अधिकार प्रदान कर सकती है। शोध में सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक स्वतंत्रता तथा संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया है। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए कानूनों का समयानुकूल एवं समावेशी होना आवश्यक है।
शोधकर्ताओं का यह अध्ययन महिला सशक्तिकरण, लैंगिक न्याय, संवैधानिक समानता और विधिक सुधारों से जुड़े समकालीन विमर्शों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला माना जा रहा है। यह शोध न केवल अकादमिक जगत के लिए उपयोगी है, बल्कि नीति-निर्माताओं, विधि विशेषज्ञों और शोधार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री प्रदान करता है।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार ने डॉ. सुधीर कुमार जैन, प्रशान्त कुमार एवं दीपमाला परमार को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल शैक्षणिक एवं शोध भविष्य की कामना की है। विश्वविद्यालय परिवार ने विश्वास व्यक्त किया कि शोधकर्ताओं की यह उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भी उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी तथा विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को और अधिक सशक्त बनाएगी।
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