विश्व मधुमक्खी दिवस पर डॉ. ए.के. भौमिक ने दिया मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने का संदेश।
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सतना। विश्व मधुमक्खी दिवस 20 मई के अवसर पर डॉक्टर ए. के. भौमिक कृषि विज्ञान संकाय, ए के एस यूनिवर्सिटी ने मधुमक्खियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मधुमक्खी मनुष्य की सबसे छोटी किंतु सबसे उपयोगी मित्र कीट है। यह फूलों से पराग एवं मकरंद एकत्र कर अमृत तुल्य शहद का निर्माण करती है तथा फसलों को किसी प्रकार की क्षति पहुँचाए बिना परागण की प्रक्रिया के माध्यम से उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि करती है।

उन्होंने बताया कि मधुमक्खियों द्वारा परागण से फसलों के उत्पादन में औसतन 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि होती है। मक्का, सूरजमुखी, सरसों, तोरिया, तिल, जामुन, बेर, लीची, शहतूत, अमरूद, सहजन, सेव तथा विभिन्न सब्जी फसलों में मधुमक्खियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शहद के अलावा मधुमक्खियों से मोम, गोंद, पराग, राज अवलेह एवं मधुमक्खी विष जैसे उपयोगी उत्पाद भी प्राप्त होते हैं, जिनका औषधीय महत्व है।

डॉ. भौमिक ने कहा कि मधुमक्खी पालन कम लागत में अधिक आय देने वाला ग्रामीण स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम है। इससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। इसी उद्देश्य से ए के एस यूनिवर्सिटी में माननीय प्रतिकुलाधिपति इंजी. अनंत कुमार सोनी के मार्गदर्शन में “शहद वाटिका” की स्थापना की गई है, जहाँ कृषकों, विद्यार्थियों एवं इच्छुक युवक-युवतियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।उन्होंने सभी लोगों से मधुमक्खी संरक्षण एवं मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा कि इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बेरोजगारी की समस्या के समाधान में भी मदद मिलेगी।

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