फॉरेस्ट एरिया से “गायब” हुए सैकड़ों पेड़, होगी जाँच , टीम गठित
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रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में संचालित भारतमाला सड़क निर्माण परियोजना एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। सिसरिंगा घाट क्षेत्र में निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित सीमा से बाहर वन क्षेत्र में कथित अवैध हस्तक्षेप और बड़ी संख्या में बहुमूल्य पेड़ों को जड़ सहित उखाड़े जाने के आरोप सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार निर्माण कार्य में लगी डीबीएल कंपनी द्वारा सड़क निर्माण साइट से लगे फॉरेस्ट एरिया में भारी मशीनों की मदद से अनेक इमारती पेड़ों को धराशायी किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि पेड़ों को काटने के बाद उनके अवशेष भी मौके से रहस्यमयी तरीके से हटा दिए गए, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य के दौरान एक से अधिक सरकारी परिसंपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया या हटाया गया है। जबकि सूत्रों के मुताबिक जिन स्थानों पर कार्रवाई हुई, वे भूमि अधिग्रहण की निर्धारित सीमा में शामिल ही नहीं थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बिना वैधानिक अनुमति के वन क्षेत्र और सरकारी संपत्तियों तक निर्माण गतिविधियां कैसे पहुंचीं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और वन विभाग ने तत्काल संज्ञान लिया है। जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जांच टीम गठित कर दी गई है। वन विभाग की टीम रविवार को मौके पर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम का भौतिक सत्यापन करेगी।

धरमजयगढ़ उप वन मंडल अधिकारी सुयश धर दीवान ने पुष्टि करते हुए कहा कि सिसरिंगा घाट क्षेत्र में भारतमाला सड़क निर्माण कार्य से जुड़े अनियमितता के आरोपों की जांच के लिए विभागीय टीम गठित की गई है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब पूरे क्षेत्र की नजर इस जांच पर टिकी हुई है कि क्या यह मामला सिर्फ “निर्माण में लापरवाही” तक सीमित है या फिर वन संपदा और सरकारी परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का कोई बड़ा खेल इसके पीछे छिपा है।
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