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पावर प्रोजेक्ट की जमीन पर धान की खेती ? जहां उद्योग की चर्चा, वहां रिकॉर्ड में धान की फसल !

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धरमजयगढ़ क्षेत्र में संचालित धनवाड़ा पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी भूमि की गिरदावरी को लेकर नया विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, कंपनी से संबंधित भूमि के राजस्व अभिलेखों में बाकायदा “धान की फसल” दर्ज होना बताया जा रहा है, जिसके बाद राजस्व प्रक्रिया और वास्तविक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि संबंधित भूमि लंबे समय से परियोजना और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी बताई जाती रही है। ऐसे में गिरदावरी में धान की खेती दर्ज होना लोगों को चौंका रहा है। यदि भूमि पर वास्तव में परियोजना संबंधी गतिविधियां चल रही हैं या भूमि का उपयोग अन्य प्रयोजनों में हो रहा है, तो फिर राजस्व रिकॉर्ड में धान की फसल का उल्लेख किस आधार पर किया गया। वहीं यदि वास्तव में खेती हुई है, तो उसकी वास्तविक स्थिति और मौके का सत्यापन भी आवश्यक माना जा रहा है।
राजस्व मामलों से जुड़े जानकारों के अनुसार, गिरदावरी का उद्देश्य भूमि की वास्तविक स्थिति और उपयोग का रिकॉर्ड तैयार करना होता है। ऐसे में यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या संबंधित गिरदावरी मौके पर जाकर की गई थी या केवल कार्यालयीन स्तर पर अभिलेख तैयार कर दिए गए।
मामले में अब कई सवाल उठ रहे हैं
क्या संबंधित भूमि पर वास्तव में धान की खेती की गई थी?
क्या गिरदावरी का भौतिक सत्यापन किया गया था?
क्या मौके की स्थिति और राजस्व रिकॉर्ड एक-दूसरे से मेल खाते हैं?
यदि भूमि पर अन्य गतिविधियां मौजूद हैं, तो फिर फसल प्रविष्टि किस आधार पर दर्ज की गई?
अब माना जा रहा है कि राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि गिरदावरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और वास्तविक निरीक्षण के आधार पर हो।
फिलहाल यह मामला केवल एक फसल प्रविष्टि का नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड की सटीकता और प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बनता जा रहा है।

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