धरमजयगढ़ ट्रैक्टर हादसा मामला : हादसे के बाद साजिश ? सबूतों से छेड़छाड़ और भटकी जांच का खुलासा !
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धरमजयगढ़ – मांड नदी पर सहसराम मांझी की मौत अब साधारण हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से साक्ष्य मिटाने के प्रयास का मामला बनकर सामने आई है। शुरुआत में इसे ट्रैक्टर धोने के दौरान हाइड्रोलिक फटने से हुई दुर्घटना बताया गया , लेकिन घटनास्थल से मिले फोटो, वीडियो और हालात इस कहानी से मेल नहीं खाते। मौके पर रेत और बेलचा मिलने के साथ यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि जब नदी सूखी थी तो ट्रैक्टर वहां धोने क्यों लाया गया, जिससे अवैध रेत खनन की आशंका और गहराती है।

शुरुआती दौर में पुलिस को गुमराह कर जांच की दिशा को भटकाने का सुनियोजित प्रयास किया गया और इसमें काफी हद तक सफलता भी मिल गई थी, लेकिन मीडिया की पैनी नजर और कैमरों की सच्चाई ने पूरे घटनाक्रम की परतें खोल दीं। इसके बाद पुलिस के उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप से जांच सही ट्रैक पर लौटी और मामला नई दिशा में आगे बढ़ा।
यह जानकारी भी सामने आयी है कि आरोपी ने घटना के बाद असली ट्रैक्टर को हटाकर उसकी जगह दूसरा ट्रैक्टर खड़ा कर दिया, जो सीधे तौर पर साक्ष्य छुपाने और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश मानी जा रही है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी पर बीएनएस की धारा 106(1) और 238 के साथ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 जोड़ दी है, जिससे मामला अब साधारण दुर्घटना से आगे पहुंच गया है। बताया जाता है कि आरोपी के पास ट्रैक्टरों का नेटवर्क है, जिनका उपयोग क्षेत्र में रेत सप्लाई के लिए किया जाता है!
फिलहाल आगे की जांच जारी है, लेकिन सवाल यही है कि क्या कार्रवाई केवल चालक तक सीमित रहेगी या अवैध रेत कारोबार से जुड़े बड़े चेहरों तक भी पहुंचेगी। क्षेत्र में खास कर माण्ड नदी में जारी अवैध रेत खनन पर जिम्मेदारों की अनदेखी से अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद होते हैं , और जब कभी डोंगाघाट जैसी घटना घटित होती है तो सही आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है !
इसलिये अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाया जाना भी जरुरी है ताकि इस कदर बेखौफ़ होकर अवैध कारोबारी किसी की जान के साथ खिलवाड़ ना कर सकें !
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