April 24, 2026

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केंद्रीय स्तर पर पहुँची दो बड़ी शिकायतें, उच्च स्तरीय जांच की आहट, वन मामलों में बढ़ी हलचल

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धरमजयगढ़ – रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल से जुड़े दो गंभीर मामलों ने अब केंद्रीय स्तर पर दस्तक दे दी है। क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण में कथित अनियमितता और राजस्व वन भूमि पर अवैध खुदाई एवं निर्माण के मामलों में शिकायतें सीधे पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार तक पहुँच गई हैं। इससे क्षेत्र में उच्च स्तरीय जांच की आहट तेज हो गई है।
पहला मामला धरमजयगढ़ वन मंडल अंतर्गत बाक़ारुमा वन परिक्षेत्र में आरी डोंगरी लौह अयस्क परियोजना के एवज में कराए गए क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण से संबंधित है। शिकायत में वर्षवार एवं मदवार व्यय, कार्य स्थलों के वास्तविक अस्तित्व तथा अभिलेखों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कागजों में भारी खर्च दर्शाया गया, जबकि जमीन पर कार्य अपेक्षित स्तर पर परिलक्षित नहीं होता।
वहीं दूसरा मामला बाक़ारुमा वन परिक्षेत्र से ही जुड़ा हुआ है , मेसर्स धनवाड़ा पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की 7.5 मेगावाट जल विद्युत परियोजना से जुड़ा है, जिसमें राजस्व वन भूमि पर बिना वैध स्वीकृति खुदाई एवं निर्माण कार्य किए जाने का आरोप है। यह कृत्य वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया है।
इस प्रकरण में पहले की गई जांच एवं कार्रवाई को शिकायतकर्ता द्वारा अपर्याप्त और पक्षपातपूर्ण मानते हुए पुनः जाँच की माँग की गई है ! शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वास्तविक दोषियों की पहचान एवं जिम्मेदारी तय किए बिना प्रकरण को औपचारिक रूप से निपटाने का प्रयास किया गया। इसी आधार पर पूरे मामले की पुनः निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय स्तर पर भेजी गई शिकायतों में दोनों मामलों में भौतिक सत्यापन, तकनीकी परीक्षण एवं वित्तीय जांच कराए जाने का आग्रह किया गया है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि जब तक सभी वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त न हो जाएं, तब तक संबंधित गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक सुनिश्चित की जाए।
माना जा रहा है कि यदि इन शिकायतों पर केंद्रीय स्तर से कार्रवाई प्रारंभ होती है, तो यह न केवल संबंधित परियोजनाओं बल्कि पूरे वन प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली की गहन जांच का कारण बन सकती है। ऐसे में दोषी पाए जाने पर अधिकारियों एवं संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही से इंकार नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर, दोनों मामलों के केंद्र तक पहुँचने से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि अब मामला स्थानीय सीमाओं से बाहर निकल चुका है और राष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय होने की दिशा में बढ़ रहा है। आने वाले समय में इस जांच के परिणाम पूरे क्षेत्र में व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।

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