अवैध पत्थर ढुलाई ने ली जान: जमरगीडी हादसे ने उजागर की लापरवाही!
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धरमजयगढ़ – क्षेत्र के ग्राम जमरगीडी में हुआ दर्दनाक हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं रह गया है, बल्कि अवैध खनन और प्रशासनिक उदासीनता की गंभीर परतों को उजागर करने वाला मामला बन गया है। जंगल से अवैध रूप से पत्थर लादकर ला रहा एक भारी ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिसके नीचे दबकर एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतक की पहचान 55 वर्षीय रामप्रसाद विश्वकर्मा, निवासी जंबगा के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रैक्टर में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक पत्थर लादा गया था। उबड़-खाबड़ और जोखिम भरे कच्चे रास्ते पर चलते समय संतुलन बिगड़ा और वाहन पलट गया एक ऐसी लापरवाही, जिसने सीधे एक जिंदगी छीन ली।

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है क्या यह महज एक हादसा है, या फिर अवैध खनन के संगठित नेटवर्क की मनमानी का नतीजा?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से जंगलों से अवैध पत्थर खनन और उसकी खुलेआम ढुलाई जारी है। यह कोई छिपा हुआ खेल नहीं, बल्कि सबकी नजरों के सामने चल रहा सिलसिला है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस अवैध उत्खनन की जानकारी जिम्मेदारों को नहीं थी , या फिर कहीं न कहीं मौन सहमति ने इस अवैध कारोबार को संरक्षण दिया?

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध गतिविधि पर रोक लगाई गई होती, तो एक गरीब मजदूर को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। ग्रामीण मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने और इस पूरे मामले में शामिल जिम्मेदारों चाहे वे किसी भी स्तर के हों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इधर, पुलिस और वन विभाग ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन यह देखना अहम होगा कि यह कार्रवाई कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में जिम्मेदारों तक पहुंचती है।
जमरगीडी का यह हादसा सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जहां कानून की अनदेखी कर जंगलों का दोहन जारी है और रोजी-रोटी की मजबूरी में मजदूर अपनी जान जोखिम में डालने को विवश हैं। अब जरूरत सिर्फ जांच की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की है।
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