रेलवे की अधिग्रहित जमीन पर धान खरीदी का खेल ? लाखों के घोटाले की आशंका
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धरमजयगढ़ – क्षेत्र में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार रेलवे परियोजना के लिए वर्षों पहले जिन जमीनों का अधिग्रहण किया जा चुका है, उन्हीं भूमि अभिलेखों का इस्तेमाल कर धान खरीदी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इस खुलासे ने धान उपार्जन केंद्रों की कार्यप्रणाली, मंडी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार धान खरीदी में कथित तौर पर बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय रहा, जिन्होंने फर्जी या पुराने भूमि अभिलेखों के आधार पर किसान पंजीयन कराकर धान की बिक्री कर दी। बताया जा रहा है कि कई मामलों में असल भू-स्वामियों को इसकी जानकारी तक नहीं है, जबकि उनके नाम या दस्तावेजों के आधार पर धान बेचे जाने की बात सामने आ रही है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिन जमीनों पर रेलवे परियोजना के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्षों पहले पूरी हो चुकी है, उन्हीं जमीनों के आधार पर धान खरीदी कैसे और किसकी अनुमति से हुई, यह बड़ा सवाल बन गया है। इससे पूरी धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर संदेह गहरा गया है।
यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो धान खरीदी के नाम पर लाखों रुपये के संभावित घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। उम्मीद है कि मामले का पूरा सच जल्द ही सामने आयेगा , और धान घोटाले के इस कारनामें को किसने , कैसे और किसकी मेहरबानी से अंजाम दिया , इसका भी खुलासा जल्द ही होगा !
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