March 3, 2026

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पेड़ों के पीछे क्या छिपा है ?वनमंडल में वृक्षारोपण कार्य बना रहस्य ? लोकेशन बताने से भी कतरा रहे अधिकारी कर्मचारी !

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धरमजयगढ़ वन मण्डल अंतर्गत कैंपा एवं अन्य मदों से किए गए वृक्षारोपण कार्यों का उद्देश्य जंगलों का संरक्षण और हरियाली बढ़ाना है, लेकिन वन मण्डल अंतर्गत विभिन्न रेंजो में हुए कार्यों को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थिति यह है कि सार्वजनिक धन से हुए वृक्षारोपण का स्थल पूछना भी विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को नागवार गुजर रहा है।
वन मण्डल में कैंपा मद सहित अन्य मदों से कराए गए वृक्षारोपण कार्यों की लोकेशन पूछे जाने पर विभाग में पदस्थ एक कर्मचारी ने साफ शब्दों में जानकारी देने से इंकार कर दिया। यह व्यवहार चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि जिस योजना का पैसा जनता से जुड़ा है, उसके कार्य स्थल को बताने में भी गोपनीयता बरती जा रही है। कर्मचारी का रवैया ऐसा था मानो किसी संवेदनशील या प्रतिबंधित स्थान के बारे में पूछा गया हो।
कैंपा निधि जंगल कटाई के एवज में प्राप्त वह राशि है, जिसे वृक्षारोपण, वन संरक्षण और पर्यावरण सुधार में खर्च किया जाना अनिवार्य है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि यदि वृक्षारोपण वास्तव में जमीन पर हुआ है तो उसकी लोकेशन बताने से परहेज क्यों किया जा रहा है। क्या पौधे मौके पर मौजूद नहीं हैं, या फिर कागजों में ही हरियाली उगा दी गई है।
वन विभाग के ही दिशा-निर्देश बताते हैं कि कैंपा मद से किए गए प्रत्येक वृक्षारोपण कार्य की जियो-टैगिंग, जीपीएस लोकेशन और स्थल-वार विवरण होना चाहिए, ताकि कभी भी भौतिक सत्यापन किया जा सके। इसके बावजूद जब विभागीय कर्मचारी जानकारी देने से इंकार करते हैं, तो यह पारदर्शिता पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है।
सूत्रों के अनुसार कई जगह वृक्षारोपण कार्यों में कागजी खानापूर्ति कर ली जाती है। पौधों की संख्या, प्रजाति और जीवित रहने की वास्तविक स्थिति का मिलान शायद ही कभी किया जाता है। छाल रेंज का यह मामला भी उसी आशंका को मजबूत करता है कि कहीं वृक्षारोपण सिर्फ फाइलों तक ही सीमित न रह गया हो।
पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील विषय में किसी भी तरह की गोपनीयता संदेह पैदा करती है। यदि कार्य सही ढंग से हुआ है तो विभाग को स्वयं आगे आकर वृक्षारोपण स्थलों को दिखाना चाहिए था, न कि जानकारी छिपाने का प्रयास करना चाहिए।

पेड़ लगाना केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि भविष्य से जुड़ा सवाल है। लेकिन जिस वृक्षारोपण को सार्वजनिक रुप से प्रचारित किया जाना चाहिए उसे छिपाने का प्रयास समझ से परे है ! यदि पेड़ों की आड़ में सच छिपाया जा रहा है, तो यह हरियाली नहीं बल्कि व्यवस्था पर गहरा धब्बा है।

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