Recent Posts

March 2, 2026

Udghosh Samay News

खबर जहां हम वहां

एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च कुनकुरी में खीस्त राजा महापर्व का भव्य पर्व, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

1 min read
Spread the love

जशपुर, छत्तीसगढ़ — जशपुर जिला के कुनकुरी में स्थित एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च में रविवार को ब्रह्मांड के राजा कहे जाने वाले यीशु मसीह का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। पर्व के अवसर पर भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें ईसाई समुदाय के सभी वर्गों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे नगर में प्रभु यीशु के स्तुति–भजन और जयघोष गूंजते रहे।

शोभा यात्रा में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं तथा बच्चे पारंपरिक परिधानों में शामिल होकर धर्मावलंबियों की आस्था का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। चर्च परिसर और शोभा यात्रा मार्ग को आकर्षक रोशनी एवं फूलों से सजाया गया था।

✨ पर्व का धार्मिक महत्व

ब्रह्मांड के राजा यीशु मसीह का पर्व संसार की समस्त सृष्टि पर मसीह की संप्रभुता और शासन को स्वीकार करने के लिए मनाया जाता है। यह पर्व विश्वासियों को याद दिलाता है कि सांसारिक शासन और शक्तियां क्षणभंगुर हैं, लेकिन मसीह का राज्य शाश्वत और अनंत है।

इतिहास के अनुसार, इस पर्व की स्थापना सन् 1925 में पोप पायस XI ने धर्मनिरपेक्षता के बढ़ते प्रभाव के विरुद्ध की थी, ताकि पूरी विश्व-सभ्यता को यह संदेश दिया जा सके कि मसीह का राजत्व सभी सांसारिक शक्तियों से ऊपर है।

🔹 पर्व के प्रमुख संदेश और उद्देश्य

🔸 ईश्वर के सर्वोच्च शासन को पहचानना – यीशु मसीह को पूरे ब्रह्मांड के राजा के रूप में स्वीकार करना।
🔸 व्यक्तिगत समर्पण – विश्वासियों को अपने जीवन को प्रभु के प्रति समर्पित कर उनके राज्य को अपने हृदय में स्थापित करने का आमंत्रण।
🔸 आशा और आश्वासन – यह विश्वास कि मसीह सदैव राज्य करेगा और अंततः उसका राज्य पूरी धरती पर स्थापित होगा।
🔸 सांसारिक शक्तियों से ऊपर मसीह – त्योहार यह संदेश देता है कि दुनिया के सभी शासक और साम्राज्य नश्वर हैं, लेकिन मसीह का साम्राज्य शाश्वत है।
🔸 शांति का संदेश – व्यक्तियों, परिवारों, समाज और राष्ट्रों पर मसीह के प्रभुत्व से शांति का राज्य स्थापित करने की आशा।
🔸 आध्यात्मिक प्रेरणा – पर्व विश्वासियों को चुनौती देता है कि वे मसीह को अपने जीवन के राजा और उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर दूसरों को भी प्रेरित करें।

🎉 पूरा कुनकुरी बना आस्था का केंद्र

पर्व के दौरान विशेष प्रार्थना सभाएं, स्तुति–भजन, मोमबत्ती जुलूस और धर्मोपदेश आयोजित किए गए। दूरदराज के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम की व्यवस्था और सुरक्षा हेतु स्थानीय प्रशासन एवं स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

आस्था, भक्ति और शांति के इस पावन पर्व ने पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण उत्पन्न किया और श्रद्धालुओं ने एक साथ मिलकर विश्व शांति, सद्भाव और मानव कल्याण की प्रार्थना की।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[join_button]
WhatsApp