पत्थलगांव में दो मौतों से भड़का भूमि विवाद — चार घंटे सड़क जाम, FIR में देरी पर SI का स्थानांतरण, तहसीलदार प्रांजल मिश्रा, कांग्रेस नेता कुलविंदर भाटिया और SDOP ध्रुवेश जायसवाल ने संभाली स्थिति
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🔹 दो मौतों के बाद उग्र हुआ प्रदर्शन
पत्थलगांव (जशपुर)।
पाकरगांव भूमि विवाद में दो लोगों की मौत के बाद शुक्रवार को पत्थलगांव में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मृतक चोकरो यादव के परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सिविल अस्पताल के सामने शव रखकर चक्का जाम कर दिया।
परिजनों का कहना था कि मृतक के भाई गोवर्धन यादव की नामजद शिकायत दर्ज होने के बावजूद लगभग 18 घंटे तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
FIR दर्ज करने में देरी को लेकर आक्रोशित लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया।

🔹 स्कूल बसें रोकीं, मरीजों की आवाजाही बाधित
प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने मुख्य मार्ग पर स्कूल बसों को रोक दिया, जिनमें छोटे-छोटे बच्चे अपने घर लौट रहे थे।
करीब एक घंटे तक बसों को रास्ते में रोकने से अभिभावक परेशान रहे।
इसी बीच कुछ एम्बुलेंस और मरीजों को भी अस्पताल तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों की यह हरकत आम नागरिकों के लिए बड़ी असुविधा का कारण बनी।
हालांकि, प्रशासनिक टीम के हस्तक्षेप के बाद बच्चों को सुरक्षित उनके घरों तक भेजा गया और वाहनों की आवाजाही धीरे-धीरे बहाल कराई गई।
🔹 चार घंटे तक ठप रहा यातायात
लगातार बढ़ती भीड़ और सड़क जाम के कारण करीब चार घंटे तक पूरे शहर में यातायात पूरी तरह बाधित रहा।
स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही थी, ऐसे में प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
🔹 तीन अफसर बने हालात के नायक
इस संकटपूर्ण माहौल में तहसीलदार प्रांजल मिश्रा, एसडीओपी डॉ. ध्रुवेश कुमार जायसवाल, और कांग्रेस नेता कुलविंदर सिंह भाटिया ने मिलकर ऐसा प्रशासनिक तालमेल दिखाया, जिससे पत्थलगांव में बड़ा टकराव टल गया।
इन तीनों ने अपनी समझदारी, त्वरित निर्णय और शांत संवाद के जरिये स्थिति को नियंत्रण में लिया।

🔹 तहसीलदार प्रांजल मिश्रा — संयम और संवाद की मिसाल
सबसे पहले मौके पर पहुंचे तहसीलदार प्रांजल मिश्रा ने तनावग्रस्त भीड़ के बीच जाकर परिजनों से संवाद किया।
उन्होंने शांति और कानूनी प्रक्रिया में भरोसा रखने की अपील की।
मिश्रा के सधे हुए शब्दों और आत्मविश्वासपूर्ण व्यवहार ने माहौल को काफी हद तक शांत किया।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने भी कहा कि “प्रांजल मिश्रा ने पूरी संवेदनशीलता और संतुलन के साथ भीड़ को संभाला।”

🔹 SDOP ध्रुवेश जायसवाल — त्वरित निर्णय से बहाल हुआ भरोसा
एसडीओपी डॉ. ध्रुवेश कुमार जायसवाल ने मौके पर पहुंचकर भीड़ की मुख्य मांगों को सुना और तुरंत कार्रवाई करते हुए पत्थलगांव थाने में पदस्थ एसआई संतोष तिवारी का स्थानांतरण किया।
तिवारी पर FIR दर्ज करने में देरी का आरोप था।
डॉ. जायसवाल के इस त्वरित कदम से भीड़ का गुस्सा शांत हुआ और वार्ता का रास्ता खुला।

🔹 कुलविंदर सिंह भाटिया — संवाद से सुलझाया विवाद
विवाद के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुलविंदर सिंह भाटिया ने दोनों समाजों — यादव समाज और नागवंशी समाज — के बीच संवाद स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि “शांति सबसे बड़ी ताकत है, और न्याय प्रशासन की प्राथमिकता है।”
भाटिया ने प्रशासन और जनता के बीच भरोसा बहाल करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
🔹 विधायक गोमती साय की अपील
विधायक श्रीमती गोमती साय ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की।
उन्होंने कहा कि दोनों समाजों को संयम से काम लेना चाहिए और प्रशासन को सहयोग करना चाहिए।

🔹 नागवंशी समाज के युवक की भी मौत
विवाद में नागवंशी समाज के युवक पुस्तम नाग (पिता सेतू राम नाग) की भी मृत्यु हुई।
दोनों पक्षों के बीच विवादित भूमि के रकबे को लेकर लंबे समय से तनाव बताया जा रहा है।
🔹 प्रशासनिक तालमेल से सुलझा संकट
तहसीलदार प्रांजल मिश्रा, एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल, और कुलविंदर सिंह भाटिया की संयुक्त पहल से आखिरकार सड़क जाम समाप्त हुआ, बच्चों को सुरक्षित घर भेजा गया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई।
उनकी त्वरित पहल, शांत संवाद और सख्त प्रशासनिक नियंत्रण से पत्थलगांव में शांति वापस लौट आई।
🔹 स्थिति अब सामान्य
शाम तक शहर में स्थिति सामान्य हो गई। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए और FIR में देरी के कारणों की जांच शुरू कर दी।
प्रशासन ने बताया कि एहतियात के तौर पर क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहेगा।
मुख्य बिंदु :
- भूमि विवाद में दो मौतों के बाद पत्थलगांव में तनाव
- FIR दर्ज करने में देरी पर SI संतोष तिवारी का स्थानांतरण
- प्रदर्शन के दौरान स्कूल बसें और एम्बुलेंस रोकी गईं
- तहसीलदार प्रांजल मिश्रा, SDOP ध्रुवेश जायसवाल, और कांग्रेस नेता कुलविंदर भाटिया की संयुक्त पहल से स्थिति शांत
- विधायक गोमती साय ने निष्पक्ष जांच की मांग की
- प्रशासनिक सूझबूझ और संवाद से टला बड़ा टकराव
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