आज सजेगा आनंद मेला, रातभर होगा लोकनाट्यों का मंचन !
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67 वर्षों से चली आ रही दशहरा उत्सव की परंपरा, रामलीला और पौराणिक-लोक कथाओं की प्रस्तुतियां रहेंगी आकर्षण का केंद्र

धरमजयगढ़ – रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ का ऐतिहासिक दशहरा उत्सव अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा के लिए जाना जाता है। दुर्गोत्सव के 67वें वर्ष के अवसर पर आज अंतिम दिन भव्य आनंद मेले का आयोजन होगा। इस दौरान क्षेत्र में उत्सव की रौनक के साथ बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है।

इस आयोजन की खास पहचान यहां होने वाला रात्रिकालीन नाट्य मंचन है। अलग-अलग गांवों और क्षेत्रों से पहुंचे कलाकार रामलीला के साथ पौराणिक प्रसंगों और लोककथाओं पर आधारित नाटकों का जीवंत मंचन करते हैं। इन प्रस्तुतियों को देखने ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं और पूरी रात जागकर कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लेते हैं। लोककला और पारंपरिक रंगमंच की यह अनूठी परंपरा धरमजयगढ़ के दशहरा उत्सव को अलग पहचान देती है।

आनंद मेले में स्थानीय दुकानों के साथ बाहर से आया मीना बाजार भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले में संभावित भारी भीड़ को देखते हुए दुर्गोत्सव एवं दशहरा समिति, स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रशासन के समन्वय से शांतिपूर्ण आयोजन की तैयारियां की गई हैं

धार्मिक आस्था, लोकसंस्कृति और पारंपरिक नाट्यकला के संगम के रूप में धरमजयगढ़ का यह दशहरा उत्सव वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। आज आयोजित होने वाला आनंद मेला इसी परंपरा का प्रमुख आकर्षण रहेगा।

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