विक्रय अनुमति निरस्त होने के बाद भी बेच दी कोल ब्लॉक प्रभावित आबंटन जमीन
1 min read

धरमजयगढ़ में भू-माफियाओं का बड़ा खेल, कोर्ट को गुमराह कर कराया नामांतरण!
धरमजयगढ़ – रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित कोल ब्लॉकों की सरकारी प्रक्रिया तेज होते ही भू-माफिया सक्रिय हो गए हैं। भारी मुआवजे के लालच में नियमों को ताक पर रखकर जमीनों के अवैध अंतरण के सनसनीखेज मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में ग्राम तराईमार से एक ऐसा हाई-प्रोफाइल मामला उजागर हुआ है, जहां जिला कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए राजस्व कोर्ट को गुमराह कर प्रतिबंधित भूमि की न सिर्फ रजिस्ट्री करा ली गई, बल्कि उसका नामांतरण भी पारित करवा लिया गया।

क्या है पूरा मामला?
मामला धरमजयगढ़ के कोल ब्लॉक प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम तराईमार का है। यहां खसरा नंबर 43/2/च (रकबा 0.3730 हेक्टेयर) की भूमि वर्तमान में भू-अर्जन (कोल ब्लॉक) के लिए प्रस्तावित है। यह भूमि मूल रूप से वर्ष 1984-85 के राजस्व प्रकरण क्रमांक 05/अ 19(1) आदेश दिनांक 19/05/1985 के तहत सरकारी आबंटन (पट्टा) के रूप में प्रदान की गई थी। सरकारी आबंटन की भूमि होने के कारण इसे बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बेचा नहीं जा सकता था।

कलेक्टर ने 2021 में निरस्त किया था आवेदन, 2022 में कर दी रजिस्ट्री
कोल ब्लॉक के भारी-भरकम मुआवजे के लालच में इस जमीन को ठिकाने लगाने की तैयारी काफी पहले से चल रही थी। भूमि के विक्रय की अनुमति के लिए सक्षम जिला प्राधिकारी के समक्ष आवेदन लगाया गया था। मामले की गंभीरता और नियमों को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी ने दिनांक 04/10/2021 को विक्रय अनुमति के इस आवेदन को सिरे से खारिज़ कर दिया था।
कलेक्टर कोर्ट से झटका लगने के बावजूद भू-माफियाओं के हौसले पस्त नहीं हुए। जिलाधीश द्वारा विक्रय अनुमति निरस्त किए जाने के ठीक एक साल बाद, यानी वर्ष 2022 में इस वाद भूमि का अवैध रूप से विक्रय कर दिया गया।
राजस्व न्यायालय को रखा अंधेरे में, चुपचाप करा लिया नामांतरण
रजिस्ट्री कराने के बाद असली खेल स्थानीय राजस्व न्यायालय में खेला गया। नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान आवेदकों और भू-माफियाओं द्वारा तत्कालीन प्रचलित प्रकरण में जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए “विक्रय अनुमति निरस्त” करने के आदेश को पूरी तरह छुपा लिया गया। स्थानीय राजस्व कोर्ट को इस महत्वपूर्ण तथ्य की भनक तक नहीं लगने दी गई कि जिस जमीन के नामांतरण की गुहार लगाई जा रही है, उसे जिलाधीश पहले ही प्रतिबंधित कर चुके हैं। नतीजतन, तथ्यों को गुमराह कर स्थानीय राजस्व न्यायालय से इस विवादित भूमि का नामांतरण आदेश भी पारित करा लिया गया।
मुआवजे की रेस में नियमों की बलि!
धरमजयगढ़ क्षेत्र के कोल ब्लॉकों में आने वाली जमीनों पर भू-माफिया गिद्ध दृष्टि जमाए बैठे हैं। चूंकि इन जमीनों के बदले करोड़ों रुपये का मुआवजा मिलना तय है, इसलिए राजस्व विभाग के नियमों को ठेंगा दिखाकर कागजी हेरफेर की जा रही है। तराईमार का यह मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे जिला स्तर के सर्वोच्च अधिकारी के आदेशों की अवहेलना करते हुए निचली अदालतों से मिलीभगत या उन्हें गुमराह करके नामांतरण के खेल को अंजाम दिया जा रहा है।
Subscribe to my channel