हेलमेट बैंक तो खुल गया साहब, अब नाबालिगों के हाथों से स्कूटी की चाबी भी छीनिए!
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जशपुर पुलिस का संकल्प ‘हर हेड में हो हेलमेट’, लेकिन सड़कों पर फर्राटा भरते नाबालिगों पर कब चलेगा कानून का डंडा? रसूखदारों के बच्चों के लिए यातायात नियमों में कोई विशेष छूट तो नहीं?
जशपुर।
जशपुर पुलिस ने सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से एक अच्छी और सराहनीय पहल करते हुए ‘हेलमेट बैंक’ की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 4 नवंबर 2026 को पुलिस लाइन जशपुर में इस अभिनव पहल का शुभारंभ किया। पुलिस का संकल्प है कि किसी व्यक्ति को हेलमेट के अभाव में असुरक्षित सफर न करना पड़े। आर्थिक परेशानी हो या अचानक कहीं जाना हो, पुलिस अब हेलमेट उपलब्ध कराने में मदद करेगी।
पहल अच्छी है, उद्देश्य भी नेक है और निश्चित रूप से इसकी सराहना होनी चाहिए। लेकिन इसी बीच जशपुर की सड़कों पर एक दूसरा दृश्य भी दिखाई देता है, जो यातायात विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करता है।
हेलमेट की चिंता तो है, लेकिन नाबालिगों के हाथों में स्कूटी की चाबी किसने दी?
शहर में कथित तौर पर रसूखदार परिवारों के नाबालिग बच्चे बिना हेलमेट, बिना नंबर प्लेट और यातायात नियमों की परवाह किए स्कूटी चलाते दिखाई देते हैं। सवाल यह है कि जब पुलिस हेलमेट उपलब्ध कराने के लिए बैंक खोल सकती है, तो नाबालिगों को वाहन चलाने से रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती?
साहब, हेलमेट सिर की सुरक्षा करता है, लेकिन क्या हेलमेट पहनाकर नाबालिग को वाहन चलाने की कानूनी अनुमति भी मिल जाती है?
अगर कोई नाबालिग स्कूटी लेकर सड़क पर निकलता है तो समस्या सिर्फ हेलमेट की नहीं, बल्कि निर्धारित आयु, वाहन चलाने की अनुमति और अभिभावकों की जिम्मेदारी की भी है।
आम आदमी को चालान, रसूखदारों को मुस्कान?
जशपुर यातायात विभाग समय-समय पर हेलमेट जागरूकता, वाहन जांच और यातायात नियमों के पालन के लिए अभियान चलाता है। आम नागरिकों को नियमों का पालन करने की नसीहत भी दी जाती है।
लेकिन शहर के बीचोंबीच बिना हेलमेट और बिना नंबर प्लेट स्कूटी चलाते दिखाई देने वाले नाबालिगों के मामलों में कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
क्या यातायात विभाग की नजर इन वाहनों पर नहीं पड़ती? या फिर नजर पड़ने के बाद भी कार्रवाई करने में कोई संकोच होता है?
आखिर यह कैसी व्यवस्था है, जहां आम नागरिक को नियम समझाने के लिए पूरी टीम सड़क पर उतर आती है, लेकिन नाबालिगों के हाथों में स्कूटी की चाबी पहुंचने से रोकने के लिए उतनी ही तत्परता क्यों नहीं दिखाई देती?
एसडीओपी यातायात जशपुर और जिम्मेदार अधिकारियों से कुछ सीधे सवाल
जशपुर यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों से जनता कुछ सवालों के जवाब चाहती है।
- क्या यातायात विभाग को शहर में नाबालिगों द्वारा स्कूटी चलाने की जानकारी है?
- बिना नंबर प्लेट और बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले नाबालिगों पर कितनी कार्रवाई की गई?
- नाबालिगों को वाहन उपलब्ध कराने वाले अभिभावकों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत क्या कदम उठाए गए?
- क्या यातायात विभाग रसूखदार और सामान्य परिवारों के बच्चों के मामलों में समान कार्रवाई सुनिश्चित करेगा?
- क्या हेलमेट बैंक के साथ नाबालिग वाहन चालकों पर रोक लगाने के लिए भी कोई विशेष अभियान चलाया जाएगा?
कानून की धारा भी याद रखिए साहब!
मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 4 में वाहन चलाने की न्यूनतम आयु निर्धारित है। धारा 5 में वाहन मालिक और अभिभावक की जिम्मेदारी तय की गई है। वहीं धारा 199A में किशोर द्वारा वाहन चलाने की स्थिति में अभिभावक या वाहन मालिक के विरुद्ध दंड का प्रावधान है।
इसलिए मामला केवल हेलमेट पहनाने का नहीं है, बल्कि नाबालिगों को कानून के विरुद्ध वाहन चलाने से रोकने का भी है।
व्यंग्य तो बनता है साहब!
जशपुर पुलिस का नारा है – ‘हर हेड में हो हेलमेट’।
जनता का सवाल है – साहब, हर हाथ में स्कूटी की चाबी भी तो नहीं होनी चाहिए!
हेलमेट बैंक खोलना अच्छी पहल है, लेकिन क्या ऐसा कोई अभियान भी चलेगा जिसमें नाबालिगों के हाथों से वाहन की चाबी लेकर अभिभावकों को उनकी जिम्मेदारी समझाई जाए?
कहीं ऐसा न हो कि हेलमेट बैंक से हेलमेट लेकर कोई नाबालिग स्कूटी चलाने निकल पड़े और पुलिस उसे सुरक्षित यात्रा का प्रमाणपत्र समझ बैठे!
हेलमेट सिर बचा सकता है, लेकिन कानून तोड़ने की अनुमति नहीं दे सकता।
अब असली परीक्षा यातायात विभाग की!
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में शुरू हुई हेलमेट बैंक जैसी पहल तभी पूरी तरह सार्थक होगी, जब सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन सभी पर समान रूप से कराया जाएगा।
आम नागरिक हो या रसूखदार परिवार, कानून सबके लिए एक होना चाहिए। यातायात विभाग को चाहिए कि जशपुर शहर में विशेष जांच अभियान चलाकर नाबालिग वाहन चालकों, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करे।
आखिर में बस इतना ही सवाल है साहब – ‘हर हेड में हो हेलमेट’ का संकल्प तो आपने ले लिया, अब ‘हर नाबालिग के हाथ में वाहन की चाबी न हो’ इस दिशा में कब कदम उठाएंगे?
क्योंकि सड़क सुरक्षा का मतलब सिर्फ सिर पर हेलमेट पहनाना नहीं, बल्कि सड़क पर कानून का राज स्थापित करना भी है।
यह खबर जनहित में यातायात व्यवस्था की निष्पक्षता और जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाती है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।
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