भारत माला 130A: सड़क निर्माण पर विवादों का साया, निर्माण एजेंसी के खिलाफ बढ़ने लगा विरोध
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मेढ़रमार में निजी कृषि भूमि पर सीमेंट पिलर लगाने का मामला गरमाया, प्रभावित किसानों ने SDM को सौंपा आवेदन
सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
आपत्तियों के निराकरण तक काम रोकने की मांग

धरमजयगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग 130A के उरगा-पत्थलगांव खंड में सड़क निर्माण का काम आगे बढ़ने के साथ निर्माण एजेंसी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड के खिलाफ विरोध के अलग-अलग मामले सामने आ रहे हैं। कहीं भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की दरों को लेकर किसान असंतुष्ट हैं, तो कहीं बिना विधिवत भू-अधिग्रहण के निजी जमीन पर सड़क निर्माण संबंधी गतिविधियां किए जाने के आरोप लग रहे हैं। वहीं, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने को लेकर भी विवाद सामने आने की बात कही जा रही है। इन अलग-अलग मुद्दों के बीच परियोजना के निर्माण और प्रभावितों के अधिकारों को लेकर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।

ताजा मामला ग्राम मेढ़रमार सहित अन्य प्रभावित गांवों के भूमिस्वामियों से जुड़ा है। मुआवजा निर्धारण पर आपत्तियों का निराकरण नहीं होने के बीच निजी कृषि भूमि पर सीमेंट के पिलर लगाए जाने से नाराज किसानों ने 15 अक्टूबर को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सह सक्षम प्राधिकारी, भू-अर्जन, धरमजयगढ़ को आवेदन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है। प्रभावितों का आरोप है कि उनकी आपत्तियों पर अंतिम निर्णय लिए बिना ही जमीन पर निर्माण संबंधी गतिविधियां आगे बढ़ाई जा रही हैं।

मुआवजे का विवाद, नई गाइडलाइन से भुगतान की मांग
प्रभावित भूमिस्वामियों के अनुसार, मुआवजा निर्धारण को लेकर उन्होंने 28 सितंबर को संयुक्त अभ्यावेदन दिया था। इसके बाद 8 अक्टूबर को स्मरण-पत्र भी सौंपा गया, लेकिन उनकी आपत्तियों का अंतिम निराकरण नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि रायगढ़ जिले की नई कलेक्टर गाइडलाइन 20 फरवरी 2026 से प्रभावी हो चुकी थी, इसलिए मुआवजे की गणना में 21 फरवरी 2026 के समाचार-पत्र प्रकाशन को विधिक कट-ऑफ डेट मानते हुए नई दरों का लाभ दिया जाना चाहिए।

भूमिस्वामियों का दावा है कि नई गाइडलाइन के अनुसार संबंधित जमीन की दरें पुरानी दरों की तुलना में करीब तीन गुना तक अधिक हैं। उनका आरोप है कि 17 फरवरी 2026 की राजपत्र तिथि को आधार बनाए जाने से उन्हें नई दरों के अनुसार मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, कट-ऑफ डेट और नई गाइडलाइन की प्रयोज्यता का निर्धारण संबंधित अधिसूचनाओं तथा लागू कानूनी प्रावधानों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगा।

खड़ी फसलों के बीच पिलर लगाने का आरोप
किसानों ने आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी निजी कृषि भूमि पर, जहां फसलें खड़ी हैं, वहां भी सीमेंट के बॉर्डर पिलर लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि भूमि पर कार्रवाई से पहले भौतिक कब्जा लिए जाने के संबंध में उन्हें विधिवत सूचना नहीं दी गई है। प्रभावितों ने संविधान के अनुच्छेद 300A, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का हवाला देते हुए कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
भूमिस्वामियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि उनकी आपत्तियों का विधिसम्मत निराकरण होने और भूमि पर कार्रवाई की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक संबंधित स्थल पर चल रही गतिविधियों की जांच की जाए तथा आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। हालांकि, पिलर लगाने, निर्माण गतिविधि करने और भूमि का वास्तविक कब्जा लेने की कानूनी स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए इस मामले में संबंधित अधिसूचनाओं, भू-अर्जन अभिलेखों और मौके पर की जा रही कार्रवाई की जांच महत्वपूर्ण होगी।

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