स्वीकृति वार्डों के लिए, काम मुख्य मार्गों पर! नगर पंचायत में प्रशासनिक स्वीकृतियाँ ताक पर?
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धरमजयगढ़ – नगर पंचायत धरमजयगढ़ के वार्ड क्रमांक 08, 09 एवं 10 में हुए विद्युत विस्तार कार्य को लेकर पीजी पोर्टल में की गई शिकायत की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच के दौरान नगर पंचायत ने स्वीकार किया कि जिन स्थानों पर विद्युत ट्यूबुलर पोल लगाने की स्वीकृति मिली थी, वहां कुछ स्थान विवादित होने के कारण कार्य नहीं कराया गया। इसके स्थान पर परिषद की सर्वसम्मति से शहर के मुख्य मार्गों एवं सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता देते हुए अन्य स्थानों पर पोल स्थापित किए गए।

जांच प्रतिवेदन के अनुसार अधोसंरचना मद से वर्ष 2024-25 में वार्ड क्रमांक 08, 09 एवं 10 में विद्युत ट्यूबुलर पोल स्थापना कार्य स्वीकृत हुआ था। निविदा प्रक्रिया के बाद ठेकेदार इमरार खान को कार्यादेश जारी किया गया। प्रथम, द्वितीय एवं अंतिम देयक के माध्यम से लगभग 8.23 लाख रुपये का भुगतान स्वीकृत किया गया तथा 24 मार्च 2025 को कार्य पूर्ण होने का कम्प्लीशन सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया।
लेकिन मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच के दौरान सामने आया। अनुविभागीय अधिकारी द्वारा गठित संयुक्त टीम के स्थल निरीक्षण में पाया गया कि वार्ड क्रमांक 09 में 14 ट्यूबुलर पोल स्थापित हैं, जबकि वार्ड क्रमांक 08 एवं 10 में ट्यूबुलर लाइट पोल नहीं लगाए गए। यह तथ्य स्वयं जांच प्रतिवेदन में दर्ज किया गया है।
नगर पंचायत ने अपने बचाव में कहा कि तकनीकी स्वीकृति वाले कुछ स्थान विवादित थे, इसलिए परिषद की सहमति से कार्यस्थल बदलकर मुख्य मार्गों पर विद्युत विस्तार किया गया और यह कार्य प्राक्कलन एवं मानकों के अनुरूप कराया गया। जांच प्रतिवेदन में उपलब्ध दस्तावेजों, नगर पंचायत के जवाब और निरीक्षण के आधार पर संबंधित भुगतान को नियमों के अनुरूप बताया गया है।
हालांकि रिपोर्ट कई गंभीर प्रश्न भी छोड़ जाती है। यदि कार्य वार्ड 08, 09 एवं 10 के लिए स्वीकृत था तो कार्यस्थल बदलने की विधिवत प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति कब और किस स्तर से प्राप्त हुई? जिन वार्डों के नाम पर राशि स्वीकृत हुई, वहां कार्य नहीं होने के बावजूद अंतिम भुगतान और कम्प्लीशन सर्टिफिकेट कैसे जारी हुआ? क्या परिषद की सर्वसम्मति मात्र से स्वीकृत कार्यस्थल बदला जा सकता है, या इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की संशोधित स्वीकृति आवश्यक थी?
अब यह मामला केवल पोल लगाने का नहीं, बल्कि स्वीकृत कार्य, वास्तविक क्रियान्वयन, भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच सामंजस्य का विषय बन गया है। जांच प्रतिवेदन जिला प्रशासन को भेज दिया गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इसे अंतिम रूप से बंद मानता है या कार्यस्थल परिवर्तन एवं भुगतान प्रक्रिया की विस्तृत तकनीकी जांच कराता है।
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