लगातार घटनाओं के बीच धरमजयगढ़ में हाथियों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता !
1 min read

धरमजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी के बीच सोमवार को एक संवेदनशील घटना सामने आई। छाल रेंज अंतर्गत कंपार्टमेंट क्रमांक 511 स्थित डैम में एक हाथी शावक का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया।

सुबह डैम के कीचड़युक्त पानी में शावक का शव दिखाई देने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू की गई। वन मंडलाधिकारी की मौजूदगी में आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करते हुए हाथी शावक के शव का नियमानुसार कफन-दफन किया गया।

विभागीय जानकारी के अनुसार छाल रेंज में पिछले कई दिनों से हाथियों का बड़ा दल सक्रिय है, जिसमें नर, मादा और कई नन्हे शावक शामिल हैं। बीती रात भी कंपार्टमेंट 511 क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही दर्ज की गई थी। प्रारंभिक तौर पर यह आशंका जताई जा रही है कि हाथियों के प्रजनन काल के दौरान झुंड में बढ़ी हलचल और आपसी गतिविधियों के बीच नन्हा हाथी किसी विशालकाय हाथी के पैरों के नीचे आ गया होगा, जिससे उसकी मौत हुई होगी।
हालांकि वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगा। इस बीच क्षेत्र में लोग अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन वन्यजीव से जुड़े ऐसे मामलों में निष्कर्ष अनुमान नहीं बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी जांच के आधार पर ही निकाले जाते हैं। विभाग ने मामले की गंभीरता से जांच किए जाने की बात कही है।
गौरतलब है कि पिछले एक माह के भीतर धरमजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में हाथी शावक की मौत की यह तीसरी घटना है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने हाथियों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक विचरण क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि वन विभाग और हाथी मित्र दल लगातार जंगलों में निगरानी, ट्रैकिंग और ग्रामीणों को सतर्क करने जैसे कार्यों में जुटे हुए हैं।
वन विभाग के एक अधिकारी ने औपचारिक चर्चा में बताया कि आगामी दिनों में हाथियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त संसाधन और आधुनिक व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं। इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, ड्रोन कैमरों और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा रात्रिकालीन गश्त को और मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।
इसके अलावा हाथी प्रभावित क्षेत्रों में हाथी मित्र दलों को और सक्रिय किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट किया जा सके। जंगल क्षेत्रों में जलस्रोतों और सुरक्षित हाथी कॉरिडोर को बेहतर बनाने, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण, बिजली करंट जैसे खतरों की निगरानी तथा वन अमले को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने जैसे उपायों पर भी विभाग काम कर रहा है।
Subscribe to my channel