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May 4, 2026

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खनन परियोजना पर ब्रेक !अधूरी जानकारी के चलते मंजूरी अटकी

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धरमजयगढ़ वन मंडल अंतर्गत पुरुंगा क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है, जहां पूरी प्रक्रिया अभी अधूरी और सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार कुल 621.331 हेक्टेयर वन भूमि में से केवल 9.982 हेक्टेयर क्षेत्र का उपयोग सतही खनन गतिविधियों जैसे मशीनों और मार्ग निर्माण के लिए किया जाना प्रस्तावित है, जबकि शेष भूमि पर भूमिगत खनन की योजना बताई गई है। लेकिन सबसे गंभीर पहलू यह है कि जमीन धंसने की संभावना को लेकर अनिवार्य रिपोर्ट अब तक प्रस्तुत नहीं की गई है, जबकि यह रिपोर्ट जमा करना आवश्यक है।
उपलब्ध सैटेलाइट चित्रों के विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि प्रस्तावित वन क्षेत्र के भीतर पहले से पक्के निर्माण, सड़कें, जल स्रोत और कृषि भूमि मौजूद हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र पूर्णतः प्राकृतिक वन नहीं रह गया है, बल्कि यहां पहले से मानव गतिविधियां संचालित हो रही हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या इस भूमि को वन से अन्य उपयोगों में परिवर्तित करने के लिए विधिवत अनुमति प्राप्त की गई थी या नहीं। यदि वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम 1980 के तहत ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई है, तो राज्य सरकार को इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
इसी बीच एक और बड़ी विसंगति सामने आई है। कोयला मंत्रालय द्वारा 27 जून 2025 को खनन योजना और खदान बंद करने की योजना को सीजी नेचुरल रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में स्वीकृति दी गई थी, जबकि वर्तमान प्रस्ताव में कार्य करने वाली कंपनी के रूप में अंबुजा सीमेंट लिमिटेड का नाम सामने आ रहा है। अर्थात जिस कंपनी को अनुमति मिली थी, वही कंपनी कार्य नहीं कर रही है। इस अंतर को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा गया है कि कंपनी परिवर्तन की प्रक्रिया किस प्रकार और किन नियमों के तहत की गई।
परियोजना से संबंधित प्रस्ताव 2 सितंबर 2025 को शासन के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति लंबित बनी हुई है। यह फाइल राज्य सचिव स्तर पर अटकी हुई है क्योंकि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा आवश्यक जानकारियां मांगी गई हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रस्ताव में कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं अधूरी हैं, जिनके बिना आगे की स्वीकृति संभव नहीं है।
पूरे घटनाक्रम को देखते हुए यह साफ है कि धरमजयगढ़ के वन क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना अभी प्रारंभिक से मध्य चरण में ही है और इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। पर्यावरण और तकनीकी पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं और जब तक इन सभी प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जाता, तब तक परियोजना को आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा।

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