6 बार निरीक्षण, फिर भी जर्जर भवन में पढ़ाई ?
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धरमजयगढ़ – विकासखंड धरमजयगढ़ के ग्राम नगदरहा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला बारूखोल की स्थिति एक बार फिर चर्चा में है। शैक्षणिक वर्ष 2024-25 की स्कूल रिपोर्ट कार्ड के अनुसार विद्यालय के चारों कक्ष बड़े मरम्मत योग्य हैं, यानी एक भी कक्षा कक्ष अच्छी स्थिति में नहीं है , और बावजूद बच्चे उस भवन की बजाय एक कच्चे मकान में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाई होती है और यहां मात्र 2 नियमित शिक्षक पदस्थ हैं, जो सभी कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं। स्कूल में पेयजल, बिजली और शौचालय की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन फर्नीचर का अभाव है। बाउंड्री वाल नहीं होने से सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। वहीं सभी मौसम में पहुँच योग्य सड़क भी उपलब्ध नहीं है।
डिजिटल शिक्षा की स्थिति और भी निराशाजनक है। शिक्षा के इस दौर में ग्रामीण विद्यार्थियों का डिजिटल संसाधनों से पूरी तरह वंचित रहना गंभीर विषय है।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल मॉनिटरिंग को लेकर खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट में दर्ज है कि शैक्षणिक निरीक्षण और सीआरसी समन्वयक द्वारा 6-6 बार विद्यालय का भ्रमण किया गया। इसके बावजूद भवन की जर्जर स्थिति जस की तस बनी हुई है। आश्चर्यजनक रूप से ब्लॉक, जिला या राज्य स्तर के किसी अधिकारी का एक भी निरीक्षण दर्ज नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सभी चार कक्ष बड़े मरम्मत योग्य घोषित हैं, तो उच्च स्तर पर संज्ञान क्यों नहीं लिया गया ?
समग्र शिक्षा के तहत ₹12,883 की राशि प्राप्त और खर्च दर्शाई गई है, तथा 20 विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तक और यूनिफॉर्म वितरित की गई है। लेकिन भवन सुधार, फर्नीचर और डिजिटल संसाधनों के अभाव ने स्कूल की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है।
स्थानीय अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने जर्जर भवन की तत्काल मरम्मत, बाउंड्री वाल निर्माण, फर्नीचर उपलब्ध कराने तथा डिजिटल सुविधाएँ मुहैया कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निरीक्षण केवल औपचारिकता न बनकर वास्तविक सुधार का माध्यम बनना चाहिए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
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