एकेएस विश्वविद्यालय में विश्व युवा कौशल दिवस पर मंथन: कौशल विकास से ही आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण
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सतना। बदलते वैश्विक परिदृश्य में कौशल ही युवाओं की सबसे बड़ी पूंजी है। इसी विचार को केंद्र में रखकर एकेएस विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) तथा शोध, नवाचार, उद्यमिता एवं कौशल विकास केंद्र (सीआरआईआईएसडी) के संयुक्त तत्वावधान में विश्व युवा कौशल दिवस-2026 पर विवेकानंद सभागार में संगोष्ठी आयोजित की गई। “साझा भविष्य के लिए कौशल” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को रोजगार, उद्यमिता, नवाचार और आत्मनिर्भरता से जुड़े कौशलों के महत्व से परिचित कराया गया।

प्रो-वाइस चांसलर प्रो. हर्षवर्धन ने कहा कि आज केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यावहारिक दक्षता ही युवाओं को प्रतिस्पर्धी दुनिया में पहचान दिलाती है। उन्होंने बताया कि एकेएस विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम तथा भारत सरकार के विभिन्न सेक्टर स्किल काउंसिलों के सहयोग से विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है।
प्रो-वाइस चांसलर प्रो. आर.एस. त्रिपाठी ने विद्यार्थियों से निरंतर सीखते रहने और समय की मांग के अनुरूप अपनी दक्षताओं को विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह व्यवहार में उतरकर व्यक्ति को सक्षम और आत्मविश्वासी बनाए।
प्रो-वाइस चांसलर प्रो. जी.सी. मिश्रा ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य युवाओं को रोजगारोन्मुख, उत्तरदायी और समाजोपयोगी बनाना है। उन्होंने कौशल विकास को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों से नवाचार और उत्कृष्टता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
सीआरआईआईएसडी के निदेशक प्रो. कमलेश चौरे ने विश्वविद्यालय में संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इन पहलों का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, उद्यमिता और स्वरोजगार की भावना को सुदृढ़ करना है।
प्रोजेक्ट ऑपरेशन डायरेक्टर प्रो. एल.एन. शर्मा ने कौशल प्रशिक्षण के व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उच्च शिक्षण संस्थानों में कौशल आधारित शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे विद्यार्थी रोजगार के साथ-साथ उद्यम सृजन के लिए भी तैयार हो सकें।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा उद्यमियों को ऐसे व्यावहारिक कौशलों से जोड़ना था, जो देश के आर्थिक और सतत विकास में सार्थक योगदान दे सकें। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प भी व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में रजत सिंह, दीपक सिंह, डॉ. विवेक और डॉ. सौरभ सिंह की विशेष भूमिका रही।
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