धरमजयगढ़ नगर पंचायत में कथित फर्जी बिलों और संदिग्ध भुगतानों का मामला अब और तूल पकड़ता जा रहा है। विकास कार्यों के नाम पर कागज़ों में बिल-वाउचर बनाकर भुगतान किए की शिकायतों के बीच अब सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आरोप है कि सच के उजागर होने के डर से नगर पंचायत प्रशासन निर्धारित समय-सीमा में जानकारी देने से कतरा रहा है। सवाल उठ रहा है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो जानकारी देने में हिचक क्यों? आवेदक ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को यहीं नहीं छोड़ेगा। अपील से लेकर आवश्यकता पड़ने पर माननीय न्यायालय की शरण लेने तक का निर्णय लिया गया है। साथ ही इस कथित घपलेबाजी की शिकायत संबंधित उच्च अधिकारियों से भी करने की तैयारी है, ताकि बिलों के नाम पर खेले जा रहे इस खेल को पूरी तरह उजागर किया जा सके। स्थानीय स्तर पर यह मांग भी हो गई है कि सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने से मुकरने और अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। आखिर कब तक जवाबदेही से बचेगा प्रशासन —सच आखिर कब तक छुपेगा ?