धरमजयगढ़ बस स्टैंड निर्माण की निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल
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धरमजयगढ़, जिला रायगढ़।
नगर पंचायत धरमजयगढ़ के बस स्टैंड के विस्तारीकरण एवं निर्माण कार्य में निविदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक ठेकेदार ने निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए 15 अक्टूबर 2025 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी को शिकायत पत्र भेजा है।
शिकायत में कहा गया है कि निविदा क्रमांक–174682, “Extension and Construction Facility in Bus Stand Nagar Panchayat Dharamjaigarh” के अंतर्गत 98.03 लाख रुपये की लागत से यह कार्य आमंत्रित किया गया था।
नगरपालिका द्वारा 1 सितंबर 2025 को ऑनलाइन निविदा आमंत्रण जारी किया गया था, जिसमें प्रतिभागी ठेकेदारों के लिए ऑनलाइन सत्यापित अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य बताया गया था।
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ठेकेदार के आरोप

शिकायतकर्ता ठेकेदार का आरोप है कि निविदा जमा करते समय जहां कुछ ठेकेदारों ने अपूर्ण या मैन्युअल प्रमाण पत्र जमा किए, वहीं उसने सभी दस्तावेज ऑनलाइन सत्यापित रूप में प्रस्तुत किए। इसके बावजूद, उसके अनुभव प्रमाण पत्र को अस्वीकार कर दिया गया।
ठेकेदार ने बताया कि 14 अक्टूबर 2025 को अनुभव प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद उसने सभी आवश्यक दस्तावेज और समय सीमा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई। फिर भी, उसके दस्तावेजों को मान्य नहीं किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ अन्य प्रतिस्पर्धी निविदाकर्ताओं के नियमों के विपरीत अनुभव प्रमाण पत्रों को स्वीकार कर लिया गया, जिससे निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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उच्च अधिकारियों को भेजी शिकायत
ठेकेदार ने अपनी शिकायत की प्रति कलेक्टर रायगढ़, अधीक्षक अभियंता लोक निर्माण विभाग, तथा एसडीएम धरमजयगढ़ को भी प्रेषित की है।
उसने निविदा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि पारदर्शिता और तकनीकी योग्यता सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनी रहे और सार्वजनिक धन का सही उपयोग हो सके।
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जनता के सवाल
इस पूरे मामले ने नगर पंचायत धरमजयगढ़ की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई?
क्या योग्य ठेकेदारों के साथ भेदभाव किया गया?
क्या प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा?
जनता अब उम्मीद कर रही है कि जिला प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जनहित में कार्रवाई करेगा।
मामले में आगे की जांच नगर पंचायत की पारदर्शिता और जवाबदेही की असली परीक्षा साबित होगी।
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