August 22, 2026

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अज्ञात महिला की मौत के बाद पार्षद जानू सिदार ने निभाया इंसानियत का फर्ज, सम्मान के साथ कराया कफ़न-दफ़न

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धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ सिविल अस्पताल में भर्ती एक अज्ञात महिला की मृत्यु के बाद सामने आई घटना ने जहां अस्पताल व्यवस्था और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए, वहीं इसी घटनाक्रम के बीच एक ऐसी तस्वीर भी सामने आई जिसने यह साबित कर दिया कि मानवता अभी मरी नहीं है।


मृत महिला की पहचान सामने नहीं आ सकी। अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई और उसके शव को लेकर स्थिति तब चर्चा में आई, जब मृत महिला से जुड़ा एक वीडियो सार्वजनिक हुआ। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय भाजपा नेताओं ने मामले को संज्ञान में लिया और अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही का मामला सुर्खियों में आ गया।
इसी बीच स्थानीय पार्षद जानू सिदार ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए मृत महिला के शव की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने महिला के अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराते हुए पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ उसका कफ़न-दफ़न कराया।
मृतका कौन थी, उसका अपना कौन था और उसकी अंतिम यात्रा में शामिल होने वाला कोई अपना क्यों नहीं था—इन सवालों का जवाब भले ही सामने न आया हो, लेकिन पार्षद जानू सिदार की पहल ने यह जरूर दिखा दिया कि किसी इंसान की पहचान उसके नाम, जाति, धर्म या रिश्तों से नहीं, बल्कि उसकी इंसानियत से होती है।
जिस महिला की जिंदगी का अंत गुमनामी में हुआ, उसे कम से कम अंतिम विदाई सम्मान के साथ मिली। यह पहल केवल एक शव के अंतिम संस्कार की व्यवस्था नहीं थी, बल्कि समाज के सामने मानवता का एक जीवंत उदाहरण थी।
एक ओर अस्पताल में मृत महिला के साथ हुई कथित लापरवाही ने संवेदनशील व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, तो दूसरी ओर उसी घटना ने यह उम्मीद भी जगाई कि मुश्किल समय में किसी अनजान इंसान के लिए खड़े होने वाले लोग आज भी हमारे समाज में मौजूद हैं।
पार्षद जानू सिदार की इस पहल को लेकर स्थानीय स्तर पर भी सकारात्मक चर्चा है। ऐसे समय में जब रिश्ते और पहचान कई बार इंसानियत पर भारी पड़ते दिखाई देते हैं, एक अज्ञात महिला के लिए आगे आकर उसके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाना निश्चित रूप से समाज के लिए एक संवेदनशील संदेश है।
कहानी का दर्दनाक पक्ष व्यवस्था की कथित लापरवाही है, लेकिन इसका मानवीय पक्ष यह है कि जब कोई अपना नहीं था, तब किसी ने उसे अपना समझकर अंतिम विदाई दी। सच यही है—इंसानियत अभी मरी नहीं है।

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