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July 18, 2026

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भारतमाला पर सवालों का पहाड़: आरओडब्ल्यू से बाहर निर्माण, उखड़े पेड़, टूटी सरकारी संपत्तियां और विरोधाभासी दावे—आखिर जिम्मेदार कौन ?

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धरमजयगढ़ – भारतमाला सड़क परियोजना अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कई गंभीर सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण स्वीकृत आरओडब्ल्यू से बाहर तक किया गया, जिससे मंदिर परिसर, सार्वजनिक शौचालय, कुएं, जल स्रोत तथा अन्य शासकीय संपत्तियां क्षतिग्रस्त हुईं। बाद में निर्माण एजेंसी द्वारा कुछ क्षतिग्रस्त संपत्तियों के पुनर्निर्माण का लिखित आश्वासन भी दिए जाने की जानकारी सामने आई।


दूसरी ओर, सिसरिंगा घाट में सागौन सहित कई पेड़ों के जड़ सहित उखाड़े जाने और बाद में उनके रहस्यमय ढंग से गायब हो जाने का दावा ग्रामीण कर रहे हैं। वहीं वन विभाग के अधिकारियों के बयान भी एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। एक अधिकारी विभागीय प्रक्रिया के तहत कटाई की बात कहते हैं, जबकि उत्पादन इकाई के रेंजर का कहना है कि परियोजना के लिए स्वीकृत सभी पेड़ों की कटाई वर्षों पहले पूरी हो चुकी थी और हाल में किसी नई कटाई की अनुमति नहीं दी गई।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि हाल में कोई अनुमति नहीं थी, तो निर्माण क्षेत्र में उखड़े हुए पेड़ कहां से आए? यदि निर्माण पूरी तरह आरओडब्ल्यू के भीतर हुआ, तो मंदिर, शौचालय, कुएं और अन्य सार्वजनिक संपत्तियां कैसे क्षतिग्रस्त हुईं? यदि नुकसान हुआ, तो उसकी जवाबदेही किसकी तय हुई?


आरओडब्ल्यू, वन नियमों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान और विभागीय बयानों में दिख रहे विरोधाभासों ने इस पूरी परियोजना की निष्पक्ष, दस्तावेज-आधारित जांच की आवश्यकता को और मजबूत कर दिया है। जब तक इन सवालों के पारदर्शी उत्तर सार्वजनिक नहीं होते, तब तक भारतमाला परियोजना पर उठ रहे सवाल खत्म होने वाले नहीं हैं।

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