रिकॉर्ड नहीं’ के जवाब से घिरा वन विभाग, उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग !
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धरमजयगढ़ – सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी पर वन विभाग के जवाब ने विभागीय अभिलेखों के संधारण और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्पादन इकाई, धरमजयगढ़ से मांगी गई महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं वित्तीय जानकारी के संबंध में विभाग ने लिखित रूप से उत्तर दिया है कि संबंधित अभिलेख उसके कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
वनपरिक्षेत्राधिकारी, उत्पादन इकाई धरमजयगढ़ द्वारा 30 जून 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि मांगी गई जानकारी एवं अभिलेख इस कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं तथा ऐसी जानकारी तैयार कर उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान भी नहीं है। विभाग ने आवेदक को प्रथम अपील का अधिकार बताते हुए अपीलीय अधिकारी के समक्ष जाने की सलाह दी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी पत्र की प्रतिलिपि प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं वनमंडलाधिकारी, धरमजयगढ़ को भी प्रेषित की गई है। अर्थात विभाग ने अपने उच्च अधिकारियों को भी आधिकारिक रूप से यह अवगत करा दिया है कि संबंधित अभिलेख उत्पादन इकाई कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं।
इस जवाब के बाद कई गंभीर प्रश्न सामने आ रहे हैं। यदि संबंधित कार्य संपादित किए गए थे, तो उनके मूल अभिलेख किस कार्यालय में सुरक्षित हैं? क्या विभागीय रिकॉर्ड का संधारण नियमानुसार किया गया है, अथवा अभिलेखों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही हुई है? सरकारी कार्यों से जुड़े अभिलेखों का उपलब्ध न होना प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही, दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब संभावना है कि मामला प्रथम अपील के माध्यम से उच्च अधिकारियों तक पहुंचेगा। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अपीलीय अधिकारी विभाग से अभिलेखों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराते हैं या नहीं। यदि उच्च अधिकारियों के समक्ष भी अभिलेख उपलब्ध न होने की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल सूचना उपलब्ध न कराने तक सीमित न रहकर विभागीय रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही की जांच का विषय भी बन सकता है।
इस मामले को लेकर वन विभाग के उच्च अधिकारियों को भी पत्र भेजकर जांच की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि यदि सरकारी कार्यों से संबंधित अभिलेख वास्तव में उपलब्ध नहीं हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय है और इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने रिकॉर्ड संधारण में हुई संभावित लापरवाही अथवा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
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