April 23, 2026

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प्राक्कलन व मापदंडों की अनदेखी, कार्यादेश को ठेंगा—वार्डों में विद्युत विस्तार कार्य सवालों के घेरे में !

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धरमजयगढ़, – नगर पंचायत द्वारा जारी कार्यादेश के तहत वार्ड क्रमांक 08, 09 और 10 में ट्यूबलर विद्युत पोल तार विस्तार कार्य किया जाना था, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर इससे अलग नजर आ रही है। आरोप है कि वार्ड 08, 09 और 10 के कई हिस्सों में यह कार्य नहीं किया गया, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और अब मामला केवल अधूरे काम तक सीमित नहीं रहकर जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
लगभग 8.36 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत इस कार्य का उद्देश्य तीनों वार्डों में विद्युत व्यवस्था को मजबूत करना था, परंतु जिन क्षेत्रों में कार्य होना था, वहां आज भी कई जगह पोल और तार नहीं लगाए गए हैं। इस संबंध में संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी का कहना है कि संख्यात्मक रूप से कार्य पूर्ण कर दिया गया है, लेकिन संख्या के साथ सवाल निर्धारित मापदंड और प्राक्कलन का भी है जिसे पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया गया है !
यहीं से विवाद और गहराता है क्योंकि स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है कि क्या इन वार्डों में आवश्यकता नहीं थी या फिर प्राथमिकता कहीं और तय कर दी गई। इसी के साथ अब जनप्रतिनिधियों विशेषकर वार्ड पार्षदों की चुप्पी भी लोगों को खटक रही है। नागरिकों का कहना है कि जब उनके क्षेत्र में काम नहीं हुआ तो पार्षदों को आगे आकर आवाज उठानी चाहिए थी, अधिकारियों और ठेकेदार से जवाब मांगना चाहिए था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल की जानकारी सामने नहीं आई है।
इस खामोशी को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं—कोई इसे प्रशासनिक दबाव बता रहा है, तो कोई राजनीतिक समीकरणों की मजबूरी, वहीं कुछ लोग इसे सीधे तौर पर जनता के मुद्दों के प्रति उदासीनता मान रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि वार्ड 09 और 10 के निवासी अब भी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि उनके हिस्से का विकास आखिर क्यों रुक गया।
पूरे घटनाक्रम ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में कार्यादेश का पालन हुआ या सिर्फ कागजों में ही काम पूरा दिखा दिया गया। साथ ही, क्या कार्य स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुसार हुआ, या इसमें भी अनदेखी की गई—यह अब जांच का विषय बनता जा रहा है।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हैं या नहीं और प्रशासन इस असमानता को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है, क्योंकि जनता अब जवाब चाहती है और अपने हक के लिए आवाज बुलंद करने के मूड में दिखाई दे रही है।

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