दुर्गापुर-सरिया कोल ब्लॉक का क्या है सच ? हस्तांतरित परियोजना या नई स्वीकृतियों वाली नई योजना ?
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डीबी पावर का कोल ब्लॉक निरस्त होने के बाद फिर आगे बढ़ी दुर्गापुर-सरिया परियोजना, नई अनुमति प्रक्रिया से बढ़ी हलचल

आसमान में जहाज-ड्रोन की उड़ान से क्षेत्र में चर्चाएँ तेज, इधर कर्नाटक पावर कागजों और जमीन पर साध रहा समीकरण

धरमजयगढ़ – दुर्गापुर-ll सरिया कोल ब्लॉक परियोजना एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। सामने आए आधिकारिक दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 2007 में डीबी पावर लिमिटेड को आवंटित यह कोल ब्लॉक बाद में कोल ब्लॉक आवंटन निरस्तीकरण की प्रक्रिया में समाप्त हो गया था। इसके साथ परियोजना से जुड़ी पूर्व स्वीकृतियाँ भी व्यवहारिक रूप से अप्रभावी हो गईं। अब परियोजना को पुनः आगे बढ़ाने के लिए नए सिरे से अनुमति प्रक्रिया संचालित की जा रही है।

अभिलेखों के अनुसार डीबी पावर को आवंटन के दौरान लगभग 290.399 हेक्टेयर वन भूमि उपयोग की स्वीकृति प्रदान की गई थी, किंतु कोल ब्लॉक निरस्त होने के बाद पूरा प्रकरण निष्प्रभावी हो गया। इसके पश्चात केंद्र सरकार ने उक्त कोल ब्लॉक कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (K
कंपनी द्वारा पूर्व स्वीकृतियों को अपने पक्ष में हस्तांतरित कराने का प्रयास किया गया, लेकिन संबंधित प्राधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि पुराने आवंटन के आधार पर मिली स्वीकृतियाँ यथावत हस्तांतरित नहीं की जा सकतीं और नई अनुमति प्रक्रिया अपनानी होगी।
इसके बाद कंपनी ने नया प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिस पर परीक्षण के दौरान विभागीय स्तर पर अनेक तकनीकी एवं दस्तावेजी कमियाँ चिन्हित की गईं।
भूमि सीमांकन, प्रतिपूरक वृक्षारोपण, सर्वे रिपोर्ट, खसरा विवरण, सीमांकन मानचित्र, अनापत्ति प्रमाणपत्र, सुरक्षा क्षेत्र निर्धारण तथा विवाद स्थिति सहित कई बिंदुओं पर अतिरिक्त जानकारी मांगी गई। कंपनी का दावा है कि अधिकांश दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए गए हैं तथा आवश्यक संशोधन भी कर दिए गए हैं।
दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि परियोजना अथवा संबंधित भूमि पर कोई वाद लंबित नहीं है। वहीं खनन पट्टा क्षेत्रफल को संशोधित कर 540 हेक्टेयर से बढ़ाकर 540.75 हेक्टेयर दर्शाया गया है, जिससे परियोजना के दायरे का विस्तार भी स्पष्ट हुआ है।
आसमान में उड़ते जहाज-ड्रोन, जमीन पर बढ़ती बेचैनी
बहरहाल, धरमजयगढ़ क्षेत्र में इन दिनों बार-बार हो रही जहाजों एवं ड्रोन की उड़ानें चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई हैं। ग्रामीण और प्रभावित क्षेत्र के लोग इन हवाई सर्वेक्षणों को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं तथा आसमान में गोते लगाते इन यानों पर लगातार नजरें टिकाए हुए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि एक ओर हवाई सर्वेक्षणों से माहौल बनाया जा रहा है, तो दूसरी ओर कर्नाटक पावर जमीन और कागजों में अपनी तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
कई बड़े सवाल अब भी बाकी
हालांकि अनुमति प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि अंतिम स्वीकृतियाँ प्राप्त होने से पूर्व यदि क्षेत्र में किसी प्रकार की प्रशासनिक या जमीनी गतिविधियाँ संचालित होती हैं, तो उनका विधिक आधार क्या होगा?
साथ ही यह भी सवाल बना हुआ है कि स्थानीय ग्रामीणों, प्रभावित समुदायों और पर्यावरणीय पक्षों को इस प्रक्रिया में किस स्तर तक शामिल किया गया है।
दुर्गापुर-सरिया कोल परियोजना अब केवल खनन परियोजना नहीं रह गई है, बल्कि यह वन, पर्यावरण, प्रशासनिक पारदर्शिता, स्थानीय अधिकारों और भूमि अधिग्रहण से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है।
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