हर घर जल” के दावों की खुल रही परतें — प्रमाण पत्र के बाद भी कई गांवों में जलापूर्ति अधूरी
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जधरमजयगढ़ – जल जीवन मिशन के तहत “हर घर जल” के दावों की चमक अब जमीनी हकीकत की कसौटी पर परखी जाने लगी है। क्षेत्र में अनेक गांवों को “हर घर नल “प्रमाणन जारी कर आधिकारिक रूप से “हर घर जल” गांव घोषित किया जा चुका है, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर सामने आ रही सूचनाएं यह संकेत दे रही हैं कि कागज़ी उपलब्धियों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर कहीं अधिक गहरा हो सकता है।
जानकारी के अनुसार कई ऐसे गांव हैं जहां योजना को पूर्ण मानते हुए प्रमाणन जारी कर दिया गया, जबकि स्थानीय स्तर पर अब भी नियमित और प्रभावी जलापूर्ति को लेकर प्रश्न बने हुए हैं। अनेक स्थानों पर जल संरचना, पाइपलाइन और अन्य व्यवस्थाएं निर्मित दिखाई देती हैं, किंतु अंतिम लाभार्थी तक निरंतर आपूर्ति का दावा व्यवहारिक रूप से पूर्णत: स्थापित नहीं दिख रहा।
सबसे गंभीर प्रश्न प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे हैं। किसी भी गांव को “हर घर जल” घोषित करने का अर्थ केवल निर्माण कार्य पूर्ण होना नहीं, बल्कि प्रत्येक लक्षित परिवार तक कार्यशील नल कनेक्शन के माध्यम से नियमित पेयजल उपलब्ध होना है। यदि प्रमाणन के बाद भी नागरिकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा, तो यह निरीक्षण, सत्यापन और रिपोर्टिंग तंत्र की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सूत्रों के अनुसार ऐसे प्रमाणित गांवों की विस्तृत जमीनी स्थिति का संकलन जारी है और आने वाले समय में उन गांवों का पूरा ब्यौरा सामने आ सकता है जिन्हें आधिकारिक रूप से “हर घर जल” घोषित किया गया, जबकि वहां की वास्तविक जलापूर्ति व्यवस्था दावों से भिन्न बताई जा रही है।
यदि यह अंतर व्यापक स्तर पर प्रमाणित होता है, तो यह केवल क्रियान्वयन एजेंसियों के लिए ही नहीं बल्कि योजना के निगरानी ढांचे के लिए भी गंभीर समीक्षा का विषय बन सकता है। क्योंकि किसी महत्वाकांक्षी सार्वजनिक योजना की सफलता का मूल्यांकन केवल कागज़ी पूर्णता से नहीं, बल्कि नागरिकों तक पहुंच रहे वास्तविक लाभ से होता है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि “हर घर जल” की घोषणाएं कितनी जमीनी हैं और कितनी केवल अभिलेखों तक सीमित।
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