UGC New Rules: ‘काला कानून’ बनकर उभरे नए नियम, सतना में फूटा जनाक्रोश, सड़कों पर उतरा सर्व समाज
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सतना।
यूजीसी (UGC) के नए नियमों ने देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं, बल्कि विवाद, असंतोष और सामाजिक टकराव पैदा कर दिया है। शुक्रवार को इसका तीखा और उग्र रूप मध्यप्रदेश के सतना में देखने को मिला, जहां ‘सर्व समाज’ के बैनर तले सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। सर्किट हाउस चौक पर UGC का पुतला दहन कर सरकार और आयोग दोनों को खुली चुनौती दी गई।
प्रदर्शनकारियों ने नए रेग्यूलेशन को “काला कानून” बताते हुए आरोप लगाया कि यह नियम शिक्षा के नाम पर एक वर्ग विशेष को निशाना बनाने की साजिश है। नारेबाजी के बीच सवाल गूंजता रहा—
“जब पूरा देश विरोध में है, अदालत रोक लगा चुकी है, तो सरकार किस दबाव में इसे बचाए बैठी है?”
शिक्षा सुधार या सामाजिक इंजीनियरिंग?
प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने आरोप लगाया कि यूजीसी का यह नियम शिक्षा सुधार से ज्यादा सामाजिक इंजीनियरिंग का खतरनाक प्रयोग है।
उनका कहना था कि यह रेग्यूलेशन छात्रों और शिक्षकों पर अनावश्यक नियंत्रण थोपकर डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करेगा।
प्रदर्शनकारी शशांक सिंह बघेल ने दो टूक शब्दों में कहा—
“यह नियम शिक्षा नहीं, उत्पीड़न का औजार है। अगर इसे लागू किया गया, तो आम छात्र और शिक्षक मानसिक शोषण के शिकार होंगे। सरकार को तुरंत इसे रद्द करना होगा।”
अदालत की चेतावनी भी बेअसर!
प्रदर्शनकारियों ने अदालत की रोक का हवाला देते हुए कहा कि न्यायपालिका पहले ही इस नियम के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जता चुकी है।
इसके बावजूद सरकार की चुप्पी ने सवालों के घेरे में उसकी मंशा खड़ी कर दी है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार जानबूझकर समय खींच रही है, ताकि विरोध की आवाज़ कमजोर पड़ जाए।
सतना बना विरोध का केंद्र
सर्किट हाउस चौक पर हालात तनावपूर्ण रहे। भारी पुलिस बल तैनात रहा, लेकिन लोगों का गुस्सा किसी से छिपा नहीं था।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि यह विवादास्पद नियम वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।
साफ संदेश: काला कानून वापस लो
प्रदर्शन के अंत में एक स्वर में मांग उठी—
UGC के नए नियम तत्काल निरस्त हों
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शी, समान और न्यायपूर्ण नीतियां लागू की जाएं
छात्रों और शिक्षकों को प्रयोगशाला का चूहा बनाना बंद किया जाए
जनता का संदेश साफ है—शिक्षा पर प्रयोग नहीं, न्याय चाहिए।
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