February 9, 2026

Udghosh Samay News

खबर जहां हम वहां

BREAKING NEWS | ‘जशपुर जनसंपर्क कांड’ में बड़ा मोड़

1 min read
Spread the love

पत्रकार की ‘लीगल स्ट्राइक’ — अफसर नूतन सिदार पर कोर्ट केस दर्ज, 10 अप्रैल को देना होगा जवाब

रायगढ़/जशपुर।
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सामने आए बहुचर्चित ‘जनसंपर्क कांड’ ने अब एक निर्णायक कानूनी मोड़ ले लिया है। पत्रकार को डराने, बदनाम करने और बिना न्यायिक प्रक्रिया के ‘अपराधी’ घोषित करने के आरोपों में जनसंपर्क विभाग की सहायक संचालक नूतन सिदार के खिलाफ न्यायालय में विधिवत परिवाद (Complaint Case) दर्ज हो चुका है।

पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने मामले में आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। अब वही अधिकारी, जिसने कथित तौर पर कानून की मर्यादाओं को लांघा, स्वयं कानूनी प्रक्रिया के घेरे में आ चुकी हैं।


कोर्ट नंबर–3 में केस रजिस्टर्ड, न्यायिक प्रक्रिया शुरू

प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार यह मामला सिविल जज जूनियर डिवीजन, घरघोड़ा के न्यायालय में दर्ज किया गया है।

मामले का विवरण :

  • केस नंबर: 26/2026
  • फाइलिंग तिथि: 16 जनवरी 2026
  • CNR नंबर: CGRG070000322026
  • केस का प्रकार: Complaint Case (परिवाद पत्र)
  • याचिकाकर्ता: ऋषिकेश मिश्रा
    • (अधिवक्ता: श्री राकेश बेहरा)
  • अनावेदिका (Respondent): नूतन सिदार

न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए इसे कोर्ट नंबर–3 में पंजीबद्ध किया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब यह विवाद प्रशासनिक नहीं बल्कि पूर्णतः न्यायिक प्रक्रिया के तहत है।


10 अप्रैल को सुनवाई, अफसर की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें

अदालत ने मामले में 10 अप्रैल 2026 को अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित की है।

  • केस स्टेज: Appearance
  • इसका अर्थ है कि कार्यवाही औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है और अब अनावेदिका को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जवाब देना होगा।

जिस अधिकारी पर पत्रकार को पुलिस और नोटिस के जरिए डराने के आरोप हैं, अब वही अधिकारी स्वयं कानून के कटघरे में खड़ी नजर आ रही हैं।


फ्लैशबैक | कैसे शुरू हुआ ‘जनसंपर्क कांड’?

इस पूरे प्रकरण की जड़ उस समय पड़ी, जब जनसंपर्क विभाग के कर्मचारी रविन्द्रनाथ राम ने कथित मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या का प्रयास किया।

पत्रकारिता की कीमत?

  • पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने इस घटना के पीछे की सच्चाई, विभागीय प्रताड़ना और
    अजय सिदार के नाम पर कथित फर्जी वेतन आहरण जैसे गंभीर आरोपों को उजागर किया।
  • खुलासे के बाद अधिकारी की ओर से कथित तौर पर प्रतिशोधात्मक कार्रवाई शुरू हुई।

गंभीर आरोप :

  • 2 सितंबर 2025 को पुलिस को दिए गए आवेदन में
    बिना किसी अदालती आदेश के पत्रकार को लिखित रूप से ‘अपराधी’ बताया गया।
  • वही पत्र कथित तौर पर कलेक्टर ग्रुप में वायरल किया गया।
  • पत्रकार को चुप कराने के उद्देश्य से 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया।

लेकिन इस बार पत्रकार ने पीछे हटने के बजाय कानून का सहारा लिया।


PMO से लेकर न्यायालय तक पहुंचा मामला

यह प्रकरण केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा।

  • प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में भी शिकायत दर्ज
    • शिकायत संख्या: PMOPG/D/2025/0229404
  • शिकायत वर्तमान में प्रक्रियाधीन है।

अब जब न्यायालय में केस नंबर 26/2026 दर्ज हो चुका है, तो यह मामला प्रशासनिक गलियारों से निकलकर न्यायिक निगरानी में आ गया है।


बड़ा सवाल : क्या अब भी चुप रहेगा प्रशासन?

  • एक ओर PMO स्तर की शिकायत,
  • दूसरी ओर न्यायालय में आपराधिक परिवाद

अब सवाल उठता है—

  • क्या जशपुर प्रशासन और पुलिस इस मामले पर अब भी मौन साधे रहेंगे?
  • RTI के तहत जानकारी देने में की गई कथित आनाकानी क्या अब अदालत में सवालों के घेरे में आएगी?

कलम बनाम सत्ता : लोकतंत्र की असली परीक्षा

यह मामला अब सिर्फ एक पत्रकार और एक अधिकारी के बीच का विवाद नहीं रह गया है।
यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की गरिमा और कानून के समान अनुप्रयोग की परीक्षा बन चुका है।

16 जनवरी 2026 को दायर यह परिवाद
न केवल नूतन सिदार के लिए बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर साबित हो सकता है।

अब सबकी निगाहें 10 अप्रैल 2026 पर टिकी हैं, जब अदालत इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगली सुनवाई करेगी।


नोट : यह समाचार आधिकारिक अदालती रिकॉर्ड (e-Courts Services) एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है।


About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[join_button]
WhatsApp