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अनावरी से अधिक रकबा सत्यापन ? जमरगी डी, गेरसा, खड़गांव, सिसरिंगा, पोंडी छाल , कुड़ेकेला टॉप पर !

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धरमजयगढ़ – धान उपार्जन से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों और तुलनात्मक आंकड़ों के अवलोकन से अनावरी एवं रकबा सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बढ़ती दिखाई दे रही है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 के औसत उत्पादन आंकड़ों के तुलनात्मक अध्ययन में यह परिलक्षित हुआ है कि कुछ समितियों एवं उपार्जन केंद्रों में औसत उत्पादन प्रति एकड़ में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, साथ ही अनावरी से अधिक रकबा सत्यापन वाले किसानों की संख्या भी अन्य केंद्रों की तुलना में अधिक दर्शाई गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जमगीडी, गेरसा , खड़गांव-180, सिसिरिंगा, पोड़ीछाल, कुडेकेला सहित कुछ समितियों में अनावरी से अधिक रकबा सत्यापन के प्रकरण अपेक्षाकृत अधिक सामने आए हैं। इन केंद्रों में दर्ज किसानों की संख्या इस ओर संकेत करती है कि सत्यापन की प्रक्रिया का गहन परीक्षण आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी प्रकरण निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं। जानकारों के अनुसार समान भौगोलिक क्षेत्र और कृषि परिस्थितियों में उत्पादन आंकड़ों में आया यह अंतर स्वाभाविक रूप से तकनीकी समीक्षा की आवश्यकता को जन्म देता है। अनावरी निर्धारण और रकबा सत्यापन की प्रक्रिया बहु-स्तरीय होती है । इसी दृष्टि से अधिक संख्या वाले केंद्रों में प्रक्रियागत अनुपालन की समीक्षा को एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है !
यह भी अपेक्षित माना जा रहा है कि जहां उत्पादन में वृद्धि परिलक्षित हो रही है, वहां उससे संबंधित कृषि कारणों, संसाधनों के उपयोग एवं तकनीकी पहलुओं का समुचित अभिलेखीय समर्थन उपलब्ध हो। वहीं यदि कहीं आंकड़ों और वास्तविक स्थिति के मध्य अंतर की संभावना बनती है, तो उसका तथ्यात्मक परीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करना प्रशासनिक दायित्व के अंतर्गत आता है।
सूत्र बताते हैँ कि इसी क्रम में यह निर्देशित किया गया है कि ऐसे सभी किसानों, जिनका रकबा अनावरी से अधिक सत्यापित दर्शाया गया है, उनके प्रकरणों का पृथक-पृथक सत्यापन कर विवरण को तालिकाबद्ध रूप में संकलित किया जाए।
समग्र रूप से यह प्रक्रिया उपार्जन व्यवस्था की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और तथ्यात्मक मजबूती सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रशासनिक कदम के रूप में देखी जा रही है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की भ्रम या असंगति की स्थिति से बचा जा सके।

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