जनता से संवाद स्थापित करने में नाकाम क्यों रही है कंपनी ? प्रभावी संवाद तंत्र का अभाव प्रमुख कारण !
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धरमजयगढ़ – अंबुजा सीमेंट लिमिटेड की प्रस्तावित पुरुँगा कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर कंपनी का जनसंपर्क तंत्र अब भी प्रभावी संवाद स्थापित करने में असफल दिखाई दे रहा है परियोजना से जुड़े अधिकारी जनता के बीच सीधे संवाद की जगह सीमित दायरे में रहकर जनसंपर्क का प्रयास करते रहे हैं जो अब तक न तो भरोसा जगा सका है और न ही संदेह दूर कर पाया है, अब कंपनी के प्रतिनिधि गांव में जाकर अपनी इस कमी को दूर करने का प्रयास जरूर कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों के मन में घर कर चुके अविश्वास को इतनी जल्दी दूर कर पाना आसान नहीं होगा !
स्थानीय स्तर पर यह भावना गहराती जा रही है कि कंपनी के प्रतिनिधियों ने परियोजना के लाभ, संभावित रोजगार अवसरों, पुनर्वास की रूपरेखा और पर्यावरणीय प्रावधानों और अन्य शंकाओं पर स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की है जिससे ग्रामीणों के बीच भ्रम और अविश्वास की स्थिति बनी हुई है कई ग्रामवासियों का कहना है कि यदि कंपनी खुलकर संवाद करे और समुचित, प्रभावी संचार माध्यम या उचित सूचना तंत्र के माध्यम से अपनी बात सारगर्भित तथ्यों के साथ और प्रभावशाली ढंग से रखे तो जनता तक सही संदेश पहुँच सकता है! कंपनी ने अभी तक अपनी बातों को जनता तक रखने के लिये जिन माध्यमों का उपयोग किया है वे माध्यम अपनी बात सार्थक, सशक्त और प्रभावशाली ढंग से रख पाने में सफल नहीं रहे हैं, यानि उनका यह प्रयास निरर्थक ही रहा है !
माना जा रहा है कि प्रत्यक्ष, उचित, और प्रभावी संवाद तंत्र सबसे सशक्त माध्यम है जो तथ्यों को संतुलित और विश्वसनीय रूप से समाज तक पहुँचा सकता है लेकिन जब कंपनी अपने जनसंपर्क प्रयासों को केवल चुनिंदा बैठकों और बंद कक्षों तक सीमित रखती है तो संवाद की प्रक्रिया अधूरी रह जाती है परिणामस्वरूप विरोध और गलतफहमियां बढ़ती हैं और जनसुनवाई जैसे संवेदनशील आयोजन एक सहज और शांत वातावरण में संपन्न नहीं हो पाते स्थानीय निवासियों का सुझाव है कि कंपनी को अब संवाद के दायरे का विस्तार कर खुलापन और पारदर्शिता अपनानी चाहिए ताकि प्रभावित क्षेत्र में भरोसे का माहौल बन सके!
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