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March 3, 2026

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ग्रामोदय विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षांत समारोह संपन्न

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महामहिम राज्यपाल ने 37 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि और 35 उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों स्वर्ण पदक, दिशा साहू को नानाजी स्मृति गोल्ड मैडल प्रदान किया

दीक्षांत समारोह में रेगुलर मोड के 37 पीएचडी, 540 स्नातक, 222 स्नातकोत्तर और दूरवर्ती मोड के 9068, सीएमसीएलडीपी कार्यक्रम के 15755 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई

आकर्षण का केन्द्र रही दीक्षांत शोभा यात्रा

महामहिम राज्यपाल श्री मंगू भाई पटेल ने की अध्यक्षता, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार रहे मुख्य अतिथि, डीआरआई के संगठन सचिव अभय महाजन विशिष्ट अतिथि

डॉ अतुल कोठारी ने दिया दीक्षांत उद्बोधन, कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा का हुआ स्वागत भाषण

     चित्रकूट, 11 अक्टूबर 2025/ महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के दीक्षांत प्रांगण में परम्परागत गरिमा, उल्लास और उत्साह के वातावरण में सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और दीक्षांत समारोह के अध्यक्ष, मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने 37 छात्रों को शोध उपाधि व 35 उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पदक और 01 विद्यार्थी को नानाजी मेडल मंच से प्रदान किया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार रहे।
दीन दयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन विशिष्ट अतिथि रहे। राष्ट्रीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली डॉ. अतुल कोठारी ने दीक्षांत उद्बोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो0 भरत मिश्रा ने स्वागत उद्बोधन और प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कुलगुरू ने उपाधि धारकों को दीक्षांत शपथ दिलाई। दीक्षांत शोभायात्रा का नेतृत्व कुलसचिव प्रो. आरसी त्रिपाठी ने किया, जिसमें विद्यापरिषद और प्रबन्ध मण्डल के सदस्य गण सहभागी रहे। दीक्षांत समारोह का संचालन डॉ0 ललित कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर विधायक चित्रकूट सुरेन्द्र सिंह गहरवार मंचासीन रहे।,

समृद्धि के शिखर पर माता-पिता, समाज और देश को न भूलें-श्री मंगुभाई पटेल



     दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति श्री मंगु भाई पटेल ने श्रद्धेय नानाजी के कार्यों का पुण्य स्मरण किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि वंचित समुदाय के उन्नति का मार्ग प्रशस्त करना भी है। उन्होंने उपाधि धारकों से कहा कि नानाजी द्वारा स्थापित ग्रामोदय विश्वविद्यालय में अध्ययन करने का मौका आप सभी विद्यार्थियों को सौभाग्य के रूप में मिला है। उनके बौद्धिक विचारों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन की दिषा तय करें और सुखी तथा समृद्धि जीवन की ओर अग्रसर हो।
छात्रों को आशीष देते हुए कुलाधिपति ने कहा कि आप बड़ी नौकरी और बड़े पद पायें, लेकिन ये याद रखें कि आपको इस मुकाम तक पहुॅंचाने वाले आपके माता-पिता, आपका समाज, आपका देश और आपके शिक्षक हैं अतः समृद्धि और सफलता के शिखर पर पहुंच कर इन्हें कभी नही भूलें। समृद्धि पुरूषार्थ से सभी को मिल सकती है।  मेरी इच्छा है कि आप समृद्धि के साथ उदारता को भी प्राप्त करें। जैसे चित्रकूट के कण-कण में नानाजी की उदारता और उनकी संकल्प शक्ति के दर्शन होते हैं वैसे ही आपके कार्यों से आपकी और आपके विश्वविद्यालय की कीर्ति दूर-दूर तक पहुॅचे। आज के समय में लक्ष्य से भटकाने वाले बहुत से आकर्षण समाज में हैं। इनसे बचकर अपना समय और शक्ति राष्ट्र और स्व कल्याण में लगायें। विकसित भारत में हमारा जीवन कैसा हो इसके लिए आपने जो शिक्षा ग्रहण की है। उसका सदुपयोग समाज और राष्ट्र के हित में करते हुए सभी का जीवन समृद्ध और सुखमय बनाये।

उपाधि और पदक के साथ नानाजी के आदर्शों को भी साथ ले जाएं- इंदर सिंह परमार

       विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि विष्वविद्यालय की नींव रखने वाले राष्ट्र ऋषि नानाजी देश मुख की जन्म जयंती के अवसर पर दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया है। नानाजी देशमुख ने समाज के परिवर्तन के लिए चित्रकूट को अपनी कर्मभूमि बनाया। भारत की नवीन शिक्षा नीति में नानाजी का दृष्टिकोण समाहित हुआ है। कृषि के क्षेत्र में स्वास्थ्य, विज्ञान के क्षेत्र में हित नवाचार करते हुए समाज के हित में समाधान ढूढे जाये। उन्होंने कहा कि 2047 में विकसित भारत बनाने की दिषा में उद्योग पति, किसान, युवाओं सभी की भूमिका होगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया ने अनेक चुनौतियां भारत के सामने खडी की है। लेकिन भारत का दर्शन दुनिया को बाजार बनाने का नहीं, बल्कि वसुधैव कुटुम्बकम का रहा है। संपूर्ण दुनिया को एक परिवार की तरह देखना भारत की विशेषता रही है। उच्च शिक्षा मंत्री ने छात्र-छात्राओं से कहा कि सत्य निष्ठा और परिश्रम से की गई पढाई हमारी या हमारे परिवार की नहीं बल्कि देष की संपत्ति है। उच्च षिक्षा मंत्री ने ग्रामोदय विश्वविद्यालय को देश भर में अव्वल रहने की शुभकामनायें देते हुए सरकार की ओर से निरंतर सहयोग देने का आश्वासन दिया।

समाज, राष्ट्र मानवता के कल्याण में अपना योगदान देने तत्पर रहें-डॉ. अतुल कोठारी
  
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विष्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास डॉ. अतुल कोठारी ने दीक्षांत भाषण में कहा कि किसी भी विद्यार्थी के लिए यशस्वी और सार्थक जीवन का यही अर्थ है कि वह अपने व्यवसायी जीवन में सफलता प्राप्त करके स्वयं के परिवार का निर्वाह करते हुए समाज के लिए भी कुछ योगदान करने में सक्षम बनें। ताकि वह समाज राष्ट्र और मानवता के कल्याण में अपना योगदान देने के लिए हमेषा तत्पर रहे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी आगे के जीवन में सत्य और नैतिकता के रास्ते पर चले और अध्ययन के साथ-साथ आत्म चिंतन भी करें।

विद्यार्थी वक्त के अनुसार अपने स्व को पहचाने और हर मामले में स्वदेशी बने: अभय महाजन

       समारोह के विशिष्ट अतिथि और दीनदयाल षोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि भारत रत्न नानाजी देश मुख ने 75 वर्ष की आयु में चित्रकूट आकर यहां के समाज और वंचित समुदाय के साथ संवेदना के साथ जुडकर चित्रकूट को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के निर्माण से समाज परिवर्तन के संकल्प को लेकर इस विष्वविद्यालय में व्यक्तित्व का निर्माण हो रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वक्त के अनुसार अपने स्व को पहचाने और हर मामले में स्वदेशी बने। आज सारा विश्व भारत की ओर देख रहा है। भारत को विश्व गुरू के रूप में स्थापित करने के लिए विद्यार्थी अपना योगदान करें।


शिक्षा के साथ स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर उन्मुख करने का प्रयास- प्रो. भरत मिश्रा

     समारोह के आरम्भ में विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. भरत मिश्रा ने प्रगति प्रतिवेदन और स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा, शोध, प्रसार और प्रशिक्षण के परम्परागत आयामों के साथ-साथ संसाधन सृजन का नया आयाम जुडा है।  उन्होंने कहा कि यह गर्व का विषय है कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एव प्रत्ययन परिषद (नेक) द्वारा विश्वविद्यालय को ए डबल प्लस ग्रेड से सम्मानित किया गया है। साथ ही विश्व विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा श्रेणी एक के रूप विश्वविद्यालय को स्वायत्तता का स्तर प्रदान किया है। हमारी प्रतिबद्धता, गुणवत्ता एवं नवाचारों का प्रमाणा है। उन्होंने कहा कि व्यवसायिक एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को अंगीकार करते हुए युवाओं को शिक्षा  के साथ-साथ स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की ओर उन्मुख करने का सतत प्रयास किया जा रहा है।

दीक्षांत शोभा यात्रा ने मन मोहा

      दीक्षांत परम्परा के अनुसार शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। शोभा यात्रा का नेतृत्व मंच पर जाते समय कुलसचिव प्रो. आरसी त्रिपाठी ने किया। साथ में प्रबन्ध मंडल  के सदस्य गण डॉ आर पी सिंह रीवा, डॉ एन के जैन दिल्ली, प्रो टी आर शर्मा जबलपुर, शिव कुमार सिंह सोमवंशी सतना, डॉ पूर्णिमा दाते भोपाल, इंजी ब्रजेश कुमार शुक्ल रीवा, डॉ राकेश बाजपेई जबलपुर, विवेक विनायक राव धोग़ढी वर्धा, विजय पाल सिंह यादव सतना, धर्मेंद्र सिंह बिसेन सतना, मुकुंद तिवारी सतना
और विद्या परिषद सदस्य
प्रो प्रमोद कुमार पांडेय शहडोल सहित ग्रामोदय विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।
भारतीय परम्परागत वेशभूषा में सजे अतिथियों से शोभायात्रा की रौनक देखते ही बनती थी। रंगीन केसरिया साफा, कुर्ता पायजामा में जैसे भारतीय संस्कृति जीवंत हो उठी।

बच्चों की कला देख अभिभूत हुए राज्यपाल

       यूनिवर्सिटी परिसर में प्रवेश के साथ ही राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने ग्रामोदय से राष्ट्रोदय की थीम पर आधारित विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा आयोजित ग्राम जीवन प्रदर्शनी , गांव से गगन तक और डीआरआई की कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस मौके पर विश्व विद्यालय के ललित कला पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई नानाजी देशमुख मुख के जीवन पर क्रेन्द्रित चित्रकला प्रदर्शनी का राज्यपाल ने अवलोकन किया। इस मौके पर राज्यपाल ने राज्य कृषि विपणन बोर्ड मध्यप्रदेश द्वारा नव निर्मित किसान भवन के प्रथम तल का लोकार्पण किया। विश्वविद्यालय  की छात्राओं द्वारा लोक संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गये।

गॉंधी जी एवं नानाजी को दी श्रद्धांजलि

    राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के शाश्वत प्रेरणा स्रोत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और ग्रामोदय विश्वविद्यालय के परिकल्पक, संस्थापक, प्रथम कुलाधिपति भारतरत्न श्री नानाजी देशमुख की प्रतिमाओं पर माल्यापर्ण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उच्च षिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, विधायक चित्रकूट श्री सुरेन्द्र सिंह गहरवार, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. भरत मिश्रा उपस्थित रहे।
  

दीक्षांत समारोह में नियमित पाठ्यक्रम की कुल 799 उपाधियां प्रदान की गई

          महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में विश्व विद्यालय के नियमित पाठ्यक्रम में 799 उपाधियां विद्यार्थियों को प्रदान की गई। जिनमें 762 स्नातक और स्नातकोत्तर तथा 37 पीएचडी की उपाधियां षामिल हैं। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने मंच से 35 सर्वश्रेष्ठ उपाधि धारियों को गोल्ड मेडल तथा कृषि संकाय की दिशा साहू को नानाजी देशमुख  स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किया। इस अवसर पर विश्व विद्यालय के दूरवर्ती अध्ययन एवं सतत शिक्षा  केन्द्र में 5310 स्नातकोत्तर, 3758 स्नातक तथा मुख्यमंत्री नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम के 3414 स्नातकों और 12341 स्नातकों को उपाधियां प्रदान की गई। कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा द्वारा उत्तीर्ण विद्यार्थियों को शपथ दिलाने के पूर्व कृषि संकाय के अधिष्ठाता प्रो डी पी राय, कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो नन्द लाल मिश्रा, अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी संकाय के अधिष्ठाता डॉ आञ्जनेय पांडेय, विज्ञान और पर्यावरण संकाय के अधिष्ठाता प्रो एस के चतुर्वेदी, ग्रामीण विकास और प्रबंधन संकाय के अधिष्ठाता तथा निदेशक मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता कार्यक्रम  प्रो अमरजीत सिंह तथा दूरवर्ती शिक्षा कार्यक्रम के निदेशक डॉ कमलेश कुमार थापक ने पात्र उपाधिकर्ताओं और गोल्ड मेडल पाने वाले उत्कृष्ट विद्यार्थियों की जानकारी प्रस्तुत किया।
इस मौके पर पूज्य संत महात्मा, पद्मश्री डॉ बी के जैन, जे आर दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिशिर पांडेय, नगर पंचायत अध्यक्ष साधना पटेल सहित गणमान्य नागरिक, अभिभावक, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी और अध्ययन कर रहे छात्र छात्रों ने सहभागिता की।

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