March 3, 2026

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चित्रकूट में यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क विशेषज्ञ की अगुवाई में निरीक्षण दल का दौरा

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चित्रकूट, 29 सितंबर 2025: चित्रकूट की पवित्र भूमि, जो रामायण काल से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की जगह है, अब एक नई पहचान की ओर अग्रसर हो रही है। यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क विशेषज्ञ डॉ. अलीरेजा अमरीकजामी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ दल ने आज यहां प्रस्तावित चित्रकूट जियोपार्क स्थल के निरीक्षण के लिए तीन दिवसीय दौरे की शुरुआत की। यह दौरा 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगा और चित्रकूट को वैश्विक स्तर पर एक जियोपार्क के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं का गहन आकलन करेगा। यह महत्वपूर्ण कदम सोसाइटी ऑफ अर्थ साइंटिस्ट्स के सचिव डॉ. सतीश त्रिपाठी के अथक प्रयासों का परिणाम है, जिन्होंने यूनेस्को मुख्यालय को चित्रकूट जियोपार्क के लिए प्रस्ताव दिया था। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकारें इस परियोजना में संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं और दोनों ही सरकारें यूनेस्को में आवश्यक डोजियर जमा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। डॉ. त्रिपाठी के इन प्रयासों ने न केवल स्थानीय स्तर पर उत्साह पैदा किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चित्रकूट की भूवैज्ञानिक धरोहर को मान्यता दिलाने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया है।

दल के सदस्यों में प्रमुख रूप से भूतपूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल (डीडीजी), भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (जीएसआई) डॉ. सतीश त्रिपाठी, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक प्रशांत सिंह बघेल, जियोपार्क समन्वयक और पर्यावरणविद् डॉ. अश्वनी अवस्थी तथा डी.एस.एन. कॉलेज, उन्नाव के प्रोफेसर डॉ. अनिल साहू शामिल हैं। इन सभी विशेषज्ञों का अनुभव और ज्ञान इस दौरे को और अधिक प्रभावी बनाता है। डॉ. त्रिपाठी, जो जीएसआई के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं, ने लंबे समय से भारत की भूवैज्ञानिक साइटों को वैश्विक मान्यता दिलाने में योगदान दिया है। वहीं, प्रशांत सिंह बघेल पर्यटन विकास के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं, जो इस परियोजना को पर्यटन की दृष्टि से मजबूत बनाएंगे। डॉ. अश्वनी अवस्थी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रबल समर्थक हैं, जबकि डॉ. अनिल साहू शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से भूविरासत स्थलों को बढ़ावा देने में सक्रिय हैं।

दौरे के पहले दिन दल ने चित्रकूट के प्रमुख भूवैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का दौरा किया। इनमें शबरी जलप्रपात, गुप्त गोदावरी गुफा, कामदगिरी पहाड़ी, गणेश बाग और सोमनाथ मंदिर शामिल हैं। शबरी जलप्रपात, जहां रामायण में शबरी माता ने भगवान राम को बेर खिलाए थे, न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह स्थित जलप्रपात विशिष्ट है।गुप्त गोदावरी गुफा अपनी रहस्यमयी जलधारा और कार्स्ट स्थलाकृति के लिए प्रसिद्ध है, जो जियोपार्क के लिए आवश्यक मापदंड है। कामदगिरी पहाड़ी, जो परिक्रमा के लिए जानी जाती है, अपनी चट्टानी संरचनाओं और प्राचीन इतिहास से दल को प्रभावित कर रही है। गणेश बाग, जो पेशवा कालीन संरचना है, यहां के स्थापत्य को दर्शाता है। सोमनाथ मंदिर, जो प्राचीन मंदिरों में से एक है, यहां की सांस्कृतिक धरोहर को जोड़ता है। इन स्थलों का निरीक्षण करते हुए दल ने स्थानीय भूगर्भीय विशेषताओं, जैसे चट्टानों की उम्र, गठन प्रक्रिया और पर्यावरणीय महत्व इका विस्तृत अध्ययन किया।

दौरे के दौरान दल ने दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआई) के संगठन सचिव अभय महाजन से मुलाकात की और चित्रकूट में जियोपार्क के गठन पर विस्तृत चर्चा की। अभय महाजन ने इस अवसर पर कहा कि जियोपार्क की अवधारणा अंत्योदय के सिद्धांत से परस्पर जुड़ी हुई है। अंत्योदय, जो समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान पर जोर देता है, जियोपार्क के माध्यम से स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में सहायक होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि दीनदयाल शोध संस्थान नानाजी देशमुख के मार्ग पर चलते हुए इस दिशा में कार्य कर रहा है और जियोपार्क की स्थापना में यथासंभव सहयोग प्रदान करेगा। संस्थान, जो ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक संरक्षण में सक्रिय है, इस परियोजना को सामाजिक-आर्थिक आयाम प्रदान कर सकता है। महाजन के अनुसार, नानाजी देशमुख की विचारधारा, जो ग्रामीण आत्मनिर्भरता पर आधारित है, जियोपार्क के माध्यम से यहां के लोगों को नई दिशा देगी।

यूनेस्को विशेषज्ञ डॉ. अलीरेजा अमरीकजामी, जो वैश्विक जियोपार्कों के मूल्यांकन में वर्षों का अनुभव रखते हैं, ने दौरा के दौरान उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित जियोपार्क क्षेत्र में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ेंगे, जैसे पर्यटन गाइड, होमस्टे, हस्तशिल्प और कृषि आधारित उत्पादों का विपणन। अमरीकजामी ने जोर दिया कि जियोपार्क न केवल भूवैज्ञानिक महत्व को संरक्षित करता है बल्कि स्थानीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है। उनका मत है कि चित्रकूट की प्राकृतिक धरोहर, जैसे विंध्य पर्वतमाला की चट्टानें और नदियों की घाटियां, वैश्विक स्तर पर मान्यता पाने के योग्य हैं।

डॉ. अश्वनी अवस्थी, जो पर्यावरणविद् और जियोपार्क समन्वयक हैं, ने बताया कि जियोपार्क के स्थापित होने से ग्रामीण-शहरी पलायन में कमी आएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह परियोजना ग्रामीण और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी, क्योंकि पर्यटन बढ़ने से स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी। अवस्थी के अनुसार, चित्रकूट की जैव विविधता, जैसे दुर्लभ पौधे और वन्यजीव, जियोपार्क के माध्यम से संरक्षित होंगे, जो पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक होगा।

डॉ. अनिल साहू ने संरक्षण के दृष्टिकोण से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जियोपार्क क्षेत्र के सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) को बढ़ाएगा। सतत विकास का मतलब है कि हम वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करें लेकिन भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखें। साहू ने उदाहरण दिया कि यहां की गुफाएं और पहाड़ियां, जो लाखों वर्ष पुरानी हैं, संरक्षण से वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए उपलब्ध रहेंगी। उनकी शिक्षा पृष्ठभूमि से यह स्पष्ट है कि जियोपार्क छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला बनेगा।

डॉ. सतीश त्रिपाठी ने इस दौरे को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि चित्रकूट क्षेत्र में अद्वितीय भूवैज्ञानिक महत्व के स्थल मौजूद हैं। वर्तमान टीम इन्हीं स्थलों के परीक्षण के लिए क्षेत्र में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि इस क्षेत्र को यूनेस्को जियोपार्क का दर्जा प्राप्त होता है, तो यह विदेशी पर्यटन को बढ़ावा देगा। प्रभु राम से जुड़े स्थलों, जैसे शबरी जलप्रपात, गुप्त गोदावरी, रामघाट को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। त्रिपाठी के अनुसार, चित्रकूट की भूगर्भीय विशेषताएं, जैसे लाइमेस्टोन चट्टानें और प्राचीन जीवाश्म, इसे जियोपार्क के लिए आदर्श बनाती हैं। उनके प्रयासों से शुरू हुआ यह प्रस्ताव अब फलीभूत हो रहा है, और दोनों राज्य सरकारों का संयुक्त सहयोग इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह दौरा चित्रकूट को यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आकलन करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जियोपार्क क्या है? यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क एक ऐसा क्षेत्र होता है जहां भूवैज्ञानिक धरोहर को संरक्षित करते हुए सतत विकास को बढ़ावा दिया जाता है। विश्व में लगभग 177 जियोपार्क हैं, और भारत में अभी तक एक भी जियोपार्क नहीं है । दल अगले दो दिनों में अन्य संभावित स्थलों, बृहस्पति कुंड जैसे रामघाट, अनुसूया आश्रम और मंदाकिनी नदी घाटी का निरीक्षण करेगा। स्थानीय प्रशासन, जैसे जिला मजिस्ट्रेट और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा होगी, जहां समुदाय की भागीदारी पर जोर दिया जाएगा।

स्थानीय निवासियों में इस दौरे को लेकर उत्साह है। एक स्थानीय किसान ने कहा कि जियोपार्क से पर्यटन बढ़ेगा, जिससे हमारी आय बढ़ेगी। पर्यावरण संगठनों ने भी समर्थन जताया है, क्योंकि यह परियोजना वन संरक्षण को मजबूत करेगी। हालांकि, चुनौतियां भी हैं, जैसे अवैध खनन और प्रदूषण, जिन्हें दूर करने के लिए सरकारों को प्रयास करने होंगे।

कुल मिलाकर, यह दौरा चित्रकूट के लिए एक नई शुरुआत है। डॉ. त्रिपाठी के नेतृत्व में शुरू हुए प्रयास अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुके हैं। यदि सफल हुआ, तो चित्रकूट न केवल राम की नगरी के रूप में जाना जाएगा बल्कि वैश्विक जियोपार्क के रूप में भी। यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर के संतुलित विकास का प्रतीक बनेगी। अगले दिनों में दल की रिपोर्ट और यूनेस्को का निर्णय इस क्षेत्र के भविष्य को आकार देगा।

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