शराबबंदी की मुहिम को मिला औद्योगिक प्रोत्साहन, टीआरएन एनर्जी ने चारमार की महिलाओं का बढ़ाया हौसला
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सामाजिक बदलाव की पहल को हरसंभव सहयोग का मिला भरोसा

धरमजयगढ़। गांव में शराबबंदी की मुहिम चलाकर सामाजिक बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहीं ग्राम चारमार की महिलाओं के प्रयासों को उस समय प्रोत्साहन मिला, जब टीआरएन एनर्जी, भेंगारी प्रबंधन ने उन्हें अपने उद्योग परिसर का भ्रमण कराया। इस दौरान महिलाओं को न केवल बिजली उत्पादन की प्रक्रिया को करीब से जानने और समझने का अवसर मिला, बल्कि उनके सामाजिक अभियान की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन भी किया गया।
प्लांट के सुरक्षा एवं प्रशासन प्रमुख वायुनंदन पांडेय ने महिलाओं का स्वागत करते हुए उन्हें विद्युत उत्पादन के महत्व और इसकी पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि घरों में महज एक बटन दबाते ही रोशनी हो जाती है, लेकिन उस रोशनी को उपलब्ध कराने के पीछे हजारों लोगों का परिश्रम और एक जटिल औद्योगिक प्रक्रिया काम करती है। उन्होंने महिलाओं को उद्योग की कार्यप्रणाली से भी अवगत कराया।
इस अवसर पर श्री पांडेय ने ग्राम चारमार की महिलाओं द्वारा गांव में शराबबंदी के लिए चलाए जा रहे अभियान की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध महिलाओं का एकजुट होकर आगे आना और अपने गांव में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रयास करना सराहनीय पहल है। उन्होंने महिलाओं को आश्वस्त किया कि उनके इस सामाजिक अभियान को आगे बढ़ाने में टीआरएन एनर्जी प्रबंधन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।
गौरतलब है कि ग्राम चारमार की महिलाएं लंबे समय से गांव में शराबबंदी को लेकर संगठित अभियान चला रही हैं। उनके सामूहिक प्रयासों के चलते गांव में शराब बनाने की गतिविधियां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। अब महिलाएं अपने संगठन को और मजबूत बनाकर गांव में अन्य सामाजिक गतिविधियों को भी प्रभावी रूप से लागू करने की योजना पर काम कर रही हैं।
इसी सामाजिक पहल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से टीआरएन एनर्जी के वायुनंदन पांडेय ने महिलाओं को उद्योग परिसर में आमंत्रित किया। महिलाओं के लिए यह किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान का पहला भ्रमण था। इस दौरान उन्होंने प्लांट की व्यवस्थाओं, स्वच्छता और औद्योगिक परिसर की सुंदरता को करीब से देखा और इससे काफी प्रभावित हुईं।
यह भ्रमण केवल एक औद्योगिक परिसर को देखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव में सामाजिक बदलाव की दिशा में काम कर रही महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उनके प्रयासों को संस्थागत प्रोत्साहन देने की एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया।
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