बंजारी मंदिर जीर्णोद्धार मामले में बड़ा खुलासा!अपनों’ के कहने पर ‘चहेते’ को 5 लाख में दे दिया जीर्णोद्धार का ठेका” – प्रदीप सिंह, डीबीएल
1 min read

आस्था से खिलवाड़ और ‘क्लीन चिट’ के पीछे के खेल से उठा पर्दा

धरमजयगढ – रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सिसरिंगा घाट स्थित ऐतिहासिक बंजारी मंदिर की संपत्तियों को ब्लास्टिंग के बहाने जमींदोज करने का मामला अब एक बेहद संवेदनशील और संदिग्ध मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। निर्माण एजेंसी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (DBL) द्वारा अवैध रूप से ध्वस्त की गई सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों—जिसमें यात्री प्रतीक्षालय, सरकारी कुआं, सार्वजनिक शौचालय और एक अन्य भवन शामिल थे—को फिर से बनाकर देने का लिखित आश्वासन पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है।

प्रशासन और कई सरकारी विभागों की तथाकथित ‘निगरानी’ के बावजूद, कंपनी की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। मंदिर की संपत्तियों की सामूहिक लूट के बाद अब इसके जीर्णोद्धार (रिनोवेशन) कार्य में जो बंदरबांट की जा रही है, वह न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है बल्कि स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था का क्रूर मज़ाक उड़ा रही है।

चहेतों को ठेका और ‘अपनों’ को उपकृत करने का खेल!
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर दिलीप बिल्डकॉन कंपनी के लाइजनिंग का काम देख रहे अधिकारी प्रदीप सिंह का स्थानीय युवा नेता से बातचीत के दौरान एक बड़ा दावा सामने आया। अधिकारी के मुताबिक बंजारी मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के लिए चंदन नामक व्यक्ति को ₹5 लाख का ठेका दिया गया है। जब इस ठेके के आधार पर सवाल पूछा गया, तो अधिकारी ने कबूला कि यह ठेका शाखा राठिया के कहने पर दिया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि चंदन और शाखा राठिया दोनों ही बंजारी मंदिर समिति में शामिल हैं। समिति के ही लोगों को इस तरह उपकृत करना सीधे तौर पर बताता है कि किस दर्जे की मनमानी की जा रही है।

पहली जांच रिपोर्ट और ‘क्लीन चिट’ का संदिग्ध कनेक्शन
मामला सिर्फ ठेका बांटने तक सीमित नहीं है, इसके तार वन विभाग की संदिग्ध जांच से भी जुड़े हुए हैं। वन संपदा और अवैध ध्वस्तीकरण: बंजारी मंदिर की संपत्तियों सहित क्षेत्र के बहुमूल्य पेड़ों को अवैध रूप से ध्वस्त करने और रोड एलाइनमेंट को विचलित करने के मामले में वन विभाग ने एक से अधिक बार जांच कराई।पहली जांच रिपोर्ट में तत्कालीन धरमजयगढ़ रेंजर द्वारा दिलीप बिल्डकॉन कंपनी को क्लीन चिट दे दी गई थी। हालांकि एक अन्य जांच में आरोप सही पाए गए हैं, इसके साथ ही इस मामले में एक और जांच लंबित है।

क्या गवाह ही बना ठेकेदार?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस जांच रिपोर्ट में कंपनी को पाक-साफ बताया गया, उसमें गवाह के रूप में ‘चंदन’ नाम के एक शख्स का हस्ताक्षर भी है।
हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है कि यह हस्ताक्षर उसी चंदन का है जिसे ₹5 लाख का जीर्णोद्धार ठेका मिला है, लेकिन यदि यह सच है, तो यह बेहद शर्मनाक और संगठित सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
Subscribe to my channel