नवरात्रि से पहले मां बंजारी मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं हुआ तो फूटेगा जनआक्रोश ? आंदोलन की चेतावनी !
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धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ के सिसरिंगा क्षेत्र में सड़क निर्माण के दौरान हुई भारी ब्लास्टिंग के बाद क्षतिग्रस्त हुए आस्था के प्रमुख केंद्र मां बंजारी देवी मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार में हो रही देरी को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। नवरात्रि का पर्व सिर पर है और मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना के बीच मंदिर परिसर का स्वरूप अब तक पूरी तरह बहाल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय नागरिकों और वार्ड क्रमांक 08 के पार्षद जानू सिंह सिदार ने निर्माण एजेंसी डीबीएल और प्रशासन से मांग की है कि 10 अक्टूबर 2026 तक हर हाल में मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण किया जाए। लोगों का कहना है कि मां बंजारी मंदिर केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक आस्था और जनभावना का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में नवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण पर्व से पहले मंदिर परिसर की स्थिति को लेकर श्रद्धालुओं में स्वाभाविक चिंता बनी हुई है।

बताया गया है कि इस संबंध में थाना प्रभारी धरमजयगढ़ एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व धरमजयगढ़ को औपचारिक आवेदन सौंपकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। आवेदन के माध्यम से निर्माण एजेंसी से क्षतिग्रस्त हिस्सों की आवश्यक मरम्मत एवं जीर्णोद्धार का कार्य समय-सीमा के भीतर पूरा कराने की मांग रखी गई है।

स्थानीय लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 10 अक्टूबर तक मंदिर परिसर की स्थिति नहीं सुधारी गई, तो आम नागरिक और श्रद्धालु शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। आवश्यकता पड़ने पर चक्काजाम जैसे जनआंदोलनात्मक कदम उठाए जाने की बात भी कही गई है।
हालांकि, प्रस्तावित आंदोलन को लेकर प्रशासन को पहले ही सूचना दिए जाने की बात सामने आई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए समय रहते आवश्यक व्यवस्था और समाधान सुनिश्चित किया जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि नवरात्रि से पहले मां बंजारी मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बहाल कराना है।

नवरात्रि की आहट के बीच अब निगाहें प्रशासन और निर्माण एजेंसी पर टिक गई हैं। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में यदि समय रहते ठोस पहल होती है तो संभावित जनआक्रोश को टाला जा सकता है, अन्यथा लंबे समय से चली आ रही नाराजगी आंदोलन का रूप ले सकती है।
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