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September 11, 2026

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चण्डीपारा: मजदूर परिवार की बेटी अंजली मिरी ने रचा सफलता का इतिहास, CSIR-UGC NET JRF में हासिल की 127वीं रैंक! चण्डीपारा की बेटी ने लाइफ साइंस विषय में हासिल की शानदार सफलता, परिवार और गांव में खुशी का माहौल!

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जांजगीर-चांपा/पामगढ़, 11 सितंबर 2026। मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर ग्राम पंचायत चण्डीपारा की बेटी अंजली मिरी ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने परिवार, गांव और पूरे जांजगीर-चांपा जिले का मान बढ़ाया है। मजदूर परिवार से आने वाली अंजली ने CSIR-UGC NET राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा के लाइफ साइंस विषय में 127वीं रैंक हासिल कर Junior Research Fellowship (JRF) के लिए सफलता प्राप्त की है।

अंजली मिरी ग्राम चण्डीपारा निवासी राजू मिरी की बेटी हैं। सीमित आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। अंजली ने कक्षा 10वीं की परीक्षा में प्रथम स्थान, जबकि कक्षा 12वीं एवं M.Sc. में द्वितीय स्थान हासिल किया।

लगातार बेहतर प्रदर्शन से बनाई अलग पहचान: अंजली ने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई शासकीय कन्या शाला से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर शासकीय महाविद्यालय से B.Sc. तथा चैतन्य आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज से M.Sc. की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के दौरान भी उन्होंने अपनी मेहनत और अध्ययन के प्रति समर्पण को बनाए रखा।

CSIR-UGC NET में 127वीं रैंक हासिल करना उनकी शैक्षणिक यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। JRF के लिए चयन ने उनके आगे शोध एवं उच्च शिक्षा के नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं।

परिवार के सहयोग को दिया सफलता का श्रेय: अपनी सफलता पर अंजली मिरी ने इसका श्रेय अपने परिवार के सहयोग, प्रोत्साहन और निरंतर मेहनत को दिया है। उन्होंने बताया कि परिवार ने कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके चलते वह अपने लक्ष्य को हासिल कर सकीं।

गांव से जिले तक खुशी का माहौल: अंजली की इस उपलब्धि से चण्डीपारा सहित पामगढ़ और जांजगीर-चांपा जिले में खुशी का माहौल है। उनकी सफलता उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा बनी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

अंजली मिरी ने अपनी उपलब्धि से यह संदेश दिया है कि संसाधनों की कमी सफलता की राह में अंतिम बाधा नहीं होती; निरंतर मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से बड़े लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उनकी सफलता पर परिजनों, शिक्षकों, ग्रामीणों एवं शुभचिंतकों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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