SECL के प्रस्तावित कोल ब्लॉक के विरोध में धरमजयगढ़ में उमड़ा जनसैलाब
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जमीन बचाने सड़कों पर उतरे ग्रामीण, 1677 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित खनन का विरोध

धरमजयगढ़। प्रस्तावित दुर्गापुर-शाहपुर SECL ओपन कोल ब्लॉक के विरोध में गुरुवार को धरमजयगढ़ में ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। भूमि बचाव संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित जनसभा के बाद ग्रामीणों ने विशाल रैली निकालकर प्रस्तावित कोयला खनन परियोजना के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। रैली के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियां रखते हुए जल, जंगल, जमीन और आजीविका से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

समिति की ओर से बताया गया कि प्रस्तावित ओपन कोल ब्लॉक का क्षेत्रफल लगभग 1677 हेक्टेयर है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के दायरे में आने वाली भूमि से बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण परिवार और स्थानीय संसाधन प्रभावित हो सकते हैं। ग्रामीणों ने परियोजना से जुड़ी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं होने का आरोप लगाते हुए संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रिया की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।

दुर्गा मंच से एसडीएम कार्यालय तक निकली रैली
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह करीब 11 बजे धरमजयगढ़ क्लब ग्राउंड स्थित दुर्गा मंच पर जनसभा आयोजित की गई। जनसभा के बाद दोपहर करीब 2 बजे राजा गेट से ग्रामीणों की विशाल रैली रवाना हुई। रैली गांधी चौक, बस स्टैंड और पोस्ट ऑफिस रोड होते हुए रायगढ़ रोड स्थित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय पहुंची।
रैली के दौरान ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए प्रस्तावित कोयला परियोजना का विरोध जताया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी के कारण शहर में पूरे दिन इस आंदोलन की चर्चा रही। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि भूमि और स्थानीय संसाधनों से जुड़े मुद्दों को लेकर वे आगे भी सामूहिक रूप से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
आयोजकों के अनुसार जनसभा और रैली के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी, धरमजयगढ़ के समक्ष पूर्व में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। निर्धारित समय, मार्ग और अन्य शर्तों के अनुरूप शांतिपूर्ण आयोजन की अनुमति मिलने के बाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
रैली के समापन पर ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से प्रस्तावित खनन परियोजना से संभावित प्रभावित भूमि, ग्रामीणों की आजीविका, पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों से जुड़े विषयों पर अपनी आपत्तियां प्रशासन के समक्ष दर्ज कराई गईं।
भूमि बचाव संघर्ष समिति और ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल जमीन का विषय नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित क्षेत्र के लोगों की आपत्तियों और हितों पर समुचित विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से जारी रहेगा।
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