स्कूल परिसर में राखड़ डंपिंग पर प्राचार्य की भूमिका सवालों के घेरे में, कार्रवाई की उठी मांग! स्कूल टाइम में हाईवा से फ्लाई ऐश डंपिंग और जेसीबी से समतलीकरण का वीडियो सामने आया, राखड़ में खेलते दिखे मासूम बच्चे!
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जांजगीर-चांपा/पामगढ़/मुलमुला, 10 सितंबर 2026। शासकीय हाई स्कूल मुलमुला के परिसर में स्कूल समय के दौरान हाईवा ट्रकों से फ्लाई ऐश (राखड़) डंप कर जेसीबी मशीन से समतलीकरण किए जाने का मामला सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आए वीडियो में स्कूल परिसर में राखड़ डंप किए जाने के साथ छोटे-छोटे बच्चे उसी राखड़ के बीच खेलते हुए दिखाई दे रहे हैं।


मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्कूल परिसर में इतनी बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश लाकर डंपिंग और समतलीकरण की गतिविधि स्कूल प्रबंधन की जानकारी के बिना कैसे होती रही? यदि प्राचार्य को इसकी जानकारी थी तो बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इसे तत्काल रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए? और यदि जानकारी नहीं थी, तो स्कूल परिसर में हाईवा व जेसीबी के प्रवेश और काम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बीईओ ने माना—स्कूल परिसर में राखड़ से समतलीकरण गलत:
विकासखंड शिक्षा अधिकारी रामेंद्र जोशी ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी आज ही हुई है। उन्होंने स्कूल से पूरे मामले की जानकारी के साथ प्रतिवेदन लेने की बात कही है। बीईओ ने स्पष्ट किया कि फ्लाई ऐश बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है और स्कूल परिसर में राखड़ से समतलीकरण करना गलत है।
बीईओ के इस बयान के बाद अब यह जांच जरूरी हो गई है कि स्कूल परिसर में फ्लाई ऐश डंपिंग किसके निर्देश या अनुमति से हुई और इस दौरान स्कूल के बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी।
डॉक्टर ने भी बताया स्वास्थ्य के लिए खतरनाक:
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ के चिकित्सक डॉ. सौरभ यादव ने भी स्कूल परिसर में फ्लाई ऐश को बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है। उन्होंने इसके संपर्क में आने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका जताई।
ऐसे में स्कूल परिसर में बच्चों की मौजूदगी के दौरान फ्लाई ऐश की डंपिंग और समतलीकरण किए जाने का मामला और गंभीर हो जाता है।
अब प्राचार्य की भूमिका की होनी चाहिए जांच:
पूरे घटनाक्रम में प्राचार्य की भूमिका की विभागीय जांच किए जाने की मांग उठ रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि फ्लाई ऐश स्कूल परिसर में किसकी अनुमति से लाई गई, किसके निर्देश पर समतलीकरण कराया गया, क्या प्राचार्य को इसकी जानकारी थी और बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए।
यदि जांच में प्राचार्य की लापरवाही, सहमति अथवा संरक्षण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी सरकारी स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा से इस तरह समझौता न हो।
अधिकारियों ने बाइट देने से किया इनकार:
मामले को लेकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं तहसीलदार पामगढ़ से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने बाइट देने से इनकार कर दिया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देने से इनकार किया।
अब शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल से मांगे जाने वाले प्रतिवेदन और प्रस्तावित जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि स्कूल परिसर में फ्लाई ऐश डंपिंग की अनुमति किसने दी और इस पूरे मामले में प्राचार्य सहित अन्य जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होती है या नहीं।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए मामले में केवल राखड़ हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करना और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करना जरूरी है।
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